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मिक्सी इंडस्ट्री को मिलेगी नई जिंदगी, मानकपुर रोड पर चार एकड़ में कलस्टर की जमीन तैयार

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दम तोड़ रही मिक्सी इंडस्ट्री को संजीवनी मिलने का रास्ता साफ हो हो चुका है। इसके लिए मानकपुर रोड पर कलस्टर की जमीन भी तैयार हो गई है। खत्म होती इंडस्ट्री को जिंदा रखने के लिए कारोबारी खुद कसरत कर रहे हैं। कलस्टर के लिए खुद चार एकड़ जमीन खरीदी। फिर उसकी सीएलयू भी करवाई। उम्मीद थी कि कलस्टर जल्द चालू हो जाएगा पर राज्य सरकार के रवैये से कारोबारी बेहद खफा हैं। सरकार की कई शर्तें उनके गले की फांस बनी हैं। इसी वजह से अब कारोबारी फिर सीएम मनोहर लाल से मुलाकात करने की तैयारी कर रही हैं।
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21 प्लॉटों की सीएलयू में निकल गए ढाई साल
कलस्टर के लिए कारोबारियों द्वारा खुद खरीदी गई जमीन की सीएलयू लेने के लिए ही कारोबारियों को करीब ढाई साल लग गए। चार एकड़ जमीन पर अभी 21 इंडस्ट्री स्थापित की जाएंगी। केंद्र सरकार ने 2014 में मिक्सी समेत छोटी इंडस्ट्रीज को जिंदा करने के लिए कलस्टर बेस योजना बनाई थी। इसके बाद मिक्सी कारोबारियों ने योजना को लेकर इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी से मुलाकात की थी। तब उन्हें सरकार ने अपने स्तर पर जमीन की सीएलयू करवाने की बात कही थी। मगर जमीन खरीदने के बाद अधिकारी इस बात से मुकर गए। सीएम मनोहर लाल के हस्तक्षेप से सभी 21 प्लॉटों की सीएलयू हो गई थी। मगर कलस्टर के लिए भवन पर अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। अफसरों की वजह से ही पूरा मामला लटक रहा है।
1.30 करोड़ में खरीदी जाएगी मशीनरी
कलस्टर के लिए राज्य सरकार ने 1.67 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। इसमें 32 लाख रुपए तो कॉमन फेसिलिटी सेंटर के भवन निर्माण पर खर्च होंगे। शेष 1.30 करोड़ से ऑटोमेटिक मशीनरी की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। अभी तक भवन निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि ज्यादातर कारोबारी अपने प्लॉटों पर निर्माण शुरू कर चुके हैं। कलस्टर में बिजली, पानी, सीवरेज व सड़कों के निर्माण लिए भी सरकार ने दो करोड़ रुपए देने का वायदा किया था। ये पैसा भी अभी तक कारोबारियों को नहीं मिला है।
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न सब्सिडी में रियायत न लोन की सुविधा
मिक्सी इंडस्ट्री को अपग्रेड करने के लिए भी कारोबारियों के पास कोई सुविधा नहीं है। सरकार की ओर से ऐसे कारोबार को अपग्रेड समेत सुविधाओं के लिए महज 15 फीसदी सब्सिडी की व्यवस्था है। कारोबारियों की मानें तो इस सब्सिडी का उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा। क्योंकि 18 फीसदी तो इंडस्ट्री पर टैक्स है। कारोबारी चाहते हैं किसानों की तरह उन्हें भी 50 फीसदी सब्सिडी मिलनी चाहिए। क्योंकि ये रोजगार परक कारोबार है। जिससे हजारों घरों की रोटी चल रही है। कारोबारियों को मुद्रा लोन योजना का भी कोई फायदा नहीं मिल रहा है। बैंक उन्हें ये लोन देने के लिए ही तैयार नहीं होते।
मिक्सी इंडस्ट्री को मिलेगी नई जिंदगी : अग्रवाल
मिक्सी इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान अजय अग्रवाल कहते हैं कि कलस्टर बनने से मिक्सी इंडस्ट्री को नई जिंदगी मिलेगी। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अभी हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। सीएलयू में ही करीब ढाई साल खर्च हो गए। अभी सीएफसी का भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। सीएम से मुलाकात की योजना बना रहे हैं।
मिक्सी इंडस्ट्री पर गंभीरता दिखाए सरकार: सैनी
मिक्सी इंडस्ट्री एसोसिएशन के सचिव मोहन लाल सैनी ने बताया कि राज्य सरकार को मिक्सी इंडस्ट्री पर गंभीरता दिखानी चाहिए। इंडस्ट्री को जिंदा रखने के लिए हम सरकार को हर संभव मदद दे रहे हैं। मगर हमें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा है। जितनी जल्दी योजना पर काम होगा उतनी जल्दी ही कारोबारियों के साथ बेरोजगारों को भी फायदा होगा।
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1996-97 में 1000 करोड़ से टर्नओवर
1966 में देश को पहली मिक्सी उपलब्ध करवाने पर अंबाला में मिक्सी इंडस्ट्री सरकार की बेरुखी के कारण तबाह हो चुकी है। कभी यहां मिक्सी की 300 से ज्यादा छोटी-बड़ी ईकाइयां थी। अब 20-25 इंडस्ट्री ही यहां बची है। 1996-97 में इंडस्ट्री का सालाना कारोबार 1000 करोड़ था। तब तमाम बड़े ब्रांड की मिक्सी भी यहीं तैयार होती है। अब ये कारोबार पूरी तरह सिमट चुका है। ज्यादातर इंडस्ट्री हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में शिफ्ट हो चुकी हैं।
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