अंबाला सिटी के सेक्टर 10 स्थित अग्रवाल भवन में श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करवाते महाराज। प्रवक्
अंबाला सिटी। सेक्टर 10 स्थित अग्रवाल भवन में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को भक्तों की काफी भीड़ रही। इस्कॉन प्रचार समिति के तत्वावधान में आयोजित इस पावन आयोजन में व्यासपीठ से कथा व्यास साक्षी गोपाल दास ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कलियुग के प्रभाव से बचने और जीवन को सार्थक बनाने के लिए निरंतर भगवान का नाम जाप करना बेहद जरूरी है।
कथा व्यास ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भक्ति विनोद ठाकुर भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु, यदि आप मुझे अपना धाम न दे सकें, तो मेरा जन्म किसी भक्त के घर के पास नाली के कीड़े के रूप में देना। ऐसा इसलिए ताकि मुझे भक्त के घर का जूठन खाने को मिल सके, संतों के चरणों की धूल और कथा-आरती की आवाजें सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो सके। इसी प्रकार चित्रकेतु महाराज ने भी इंद्र का पद भोगने के बाद यही प्रार्थना की थी कि अगला जन्म किसी भगवान के दास के घर पर ही हो।
भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने मोती गोपी के यहां माखन चोरी का प्रसंग सुनाया। कथा के अंत में इस्कॉन प्रचार समिति की ओर से इस सात दिवसीय आयोजन को सफल बनाने वाले सभी सहयोगियों और भक्तों का आभार व्यक्त किया गया। भव्य आरती के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद और लंगर का वितरण किया गया।इसके साथ ही कथा का यह दिव्य अनुष्ठान संपन्न हो गया।
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अहंकार में डूबे कुबेर पुत्रों का हुआ उद्धार
कथा के दौरान नलकुबेर और मणिग्रीव (कुबेर के दोनों पुत्रों) की कथा का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि धन के नशे में चूर होकर दोनों देवता मंदाकिनी नदी में अप्सराओं के साथ अवांछित गतिविधियों में लिप्त थे। जब नारद मुनि वहां से गुजरे, तो उन्होंने मुनि को अपशब्द कहे। क्रोधित होकर नारद जी ने उन्हें वृक्ष (यक्ष) योनि में जाने का श्राप दे दिया। बाद में क्षमा मांगने पर नारद जी ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के स्पर्श से मुक्ति पाने का मार्ग बताया।