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चैंपियन ब्रदर्स, एक है कुली, दो चलाते है ऑटो

Wed, 09 Sep 2015 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,अंबाला
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एक तरफ तो खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं लाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर हैं। ऐसे ही तीन भाई अंबाला के हैं। इन तीनों भाइयों ने अपनी जिंदगी के कई साल हॉकी को दिए। जिला स्तर से लेकर नेशनल स्तर तक हॉकी में बुलंदी को छुआ।
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एक चैंपियन की तरह खेलते हुए कई मेडल और खिताब जीते। अपने स्पोर्ट्स कोटे के दम पर तीनों भाइयों ने रेलवे व अन्य महकमों में नौकरी का आवेदन भी किया। तीनों भाई नौकरी के लिए इंटरव्यू तक दे आए, लेकिन कोई ठोस सिफारिश न होने की वजह से तीनों अच्छी नौकरी से चूक गए।

मगर घर की जिम्मेदारी तीनों भाइयों को कटोचती गई और आखिर में तीनों भाइयों ने अपने-अपने तरीके से रोजगार का साधन चुन लिया। इन तीनों हॉकी चैंपियन भाइयों में से सबसे छोटा भाई तारा सिंह रेलवे स्टेशन पर कुली बन गया है। जबकि मंझला भाई तलविंद्र सिंह और सबसे बड़ा भाई बजिंद्र आज ऑटो रिक्शा चलाते हैं। ये तीनों भाई कैंट के मच्छौंडा इलाके की एक कॉलोनी में रहते हैं।
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चैंपियन बोले, खेल ने नहीं, सिस्टम ने हमें हरा दिया
हॉकी में अपनी खास उपलब्धियां हासिल करने वाले तीनों भाइयों के दिलों में आज खासी टीस है। तीनों का कहना है कि वे भले ही खेल में न हारे हों, लेकिन असल जिंदगी में सरकारी सिस्टम ने उन्हें हरा दिया। उनके अनुसार उनके पिता धर्म सिंह रेलवे में कर्मचारी थे। रेलवे में खिलाडिय़ों को बहुत सम्मान मिलता है, ऐसा उन्होंने सुना था। लिहाजा उन्होंने रेलवे में अपने खेल कोटे के दम पर आवेदन भी किया। वे इंटरव्यू तक दे आए, लेकिन शायद उनके पिता के पास कोई पुख्ता सिफारिश नहीं थी, इसलिए उनकी जगह उनसे कम उपलब्धि वाले खिलाडिय़ों को तो नौकरी मिल गई और वे आज तक ऐसे ही लटके हैं।

आज तक नहीं मिला पत्रों का जवाब
तीनों भाइयों का कहना है कि उन्होंने नौकरियों के लिए सांसद, रेलमंत्री को भी कई बार पत्र भेजकर उनसे आग्रह किया, लेकिन आज तक उनके पत्रों का कोई जवाब नहीं आया। उनके अनुसार खेल कोटे से रोजगार देने के मसले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। खिलाडिय़ों को मेरिट के आधार पर बिना सिफारिश के नौकरी मिलनी चाहिए। तारा सिंह सरकारी तंत्र पर सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं कि सालों हॉकी खेलकर मुझे नौकरी नहीं मिली, आज कुलीगिरी कर रहा हूं, मैने ये मान लिया कि शायद मेरी किस्मत खराब थी। लेकिन मेरे दोनों भाइयों बजिंद्र और तलविंद्र को भी स्टेट, नेशनल चैंपियन होने के बावजूद नौकरी नहीं मिली, तो क्या उनकी किस्मत भी खराब है या सरकारी सिस्टम खराब है?

अब बच्चों को थमा दी हॉकी स्टीक
सिस्टम का शिकार तीनों चैंपियन भाइयों ने अभी भी हार नहीं मानी है। तीनों भाई आज भी शाम को फरुखा खालसा के हॉकी मैदान में स्कूल की प्राइवेट कोचिंग में हॉकी को पूरा समय देते हैं। इतना ही नहीं तलविंद्र ने अपने 12 साल के बेटे प्रीत सिंह मोंटी और बजिंद्र सिंह ने अपने 13 साल के बेटे गगनदीप सिंह के हाथ में भी हॉकी स्टीक पकड़ा दी है। तीनों भाई मैदान में दूसरे बच्चों के साथ-साथ अपने बच्चों को भी हॉकी का धुरंधर बनाने के जुनून में जुट चुके हैं। तीनों का कहना है कि सरकार भी हॉकी की ओर ध्यान नहीं दे रही है। जिसका उदाहरण है कि जिस शहर से खेल मंत्री हैं, वहीं हॉकी का कोई कोच ही खेल विभाग के पास नहीं है।

हॉकी खिलाड़ी भाइयों की खेल उपलब्धियां

हॉकी खिलाड़ी अब कुली तारा सिंह
तारा सिंह ने स्कूल हॉकी नेशनल टूर्नामेंट जम्मू में दूसरा, स्टेट हॉकी टूर्नामेंट अंबाला में पहला, हरियाणा स्टेट हॉकी टूर्नामेंट भिवानी-2000 में तीसरा, हरियाणा स्टेट हॉकी टूर्नामेंट पानीपत में तीसरा,  हरियाणा स्टेट हॉकी टूर्नामेंट भिवानी -1990 में तीसरा,  हरियाणा स्टेट हॉकी फेस्टिवल करनाल में पहला, जिला हॉकी चैंपियनशिप गुड़गांव में पहला, आर्य समाज नेशनल स्कूल हॉकी टूर्नामेंट अमृतसर में पहला, हरियाणा रूरल स्टेट हॉकी टूर्नामेंट अंबाला में दूसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी व गुडग़ांव में हुए हरियाणा स्टेट हॉकी टूर्नामेंट में भी अपना दमखम दिखाया। तारा कई बार हॉकी टूर्नामेंट में बेस्ट प्लेयर घोषित किए जा चुके हैं।

हॉकी व अब आटो चालक बजिंद्र व तलविंद्र सिंह
दोनों भाइयों ने मिलकर कई टूर्नामेंट खेले और हॉकी में अपना दम दिखाया। दोनों भाइयों ने हरियाणा स्टेट सब जूनियर जवाहर लाल नेहरू हॉकी टूर्नामेंट गुड़गांव में पहला स्थान, 23वीं हरियाणा हॉकी चैंपियनशिप अंबाला में पहला स्थान, हरियाणा सब जूनियर हॉकी चैंपियनशिप भिवानी में तीसरा स्थान, स्टेट हाई स्कूल हॉकी टूर्नामेंट सोनीपत में तीसरा स्थान, हरियाणा स्टेट सब जूनियर हॉकी फेस्टिवल हिसार में तीसरा स्थान, 26वीं हरियाणा स्टेट हॉकी चैंपियन करनाल में दूसरा स्थान, आठवीं हरियाणा स्टेट हॉकी टूर्नामेंट गुडग़ांव में तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए नेशनल चैंपियनशिप सोनीपत में भी अपना दम दिखाया। हरियाणा स्टेट मिनी रूरल स्पोटर्स फेस्टिवल भिवानी की हॉकी प्रतियोगिता में तीसरा स्थान व नार्थ इंडिया ओपन टूर्नामेंट में दूसरा स्थान पाया। कई बार दोनों भाई बेस्ट प्लेयर भी रह चुके हैं।

वर्जन
जिले में अभी हॉकी का कोई कोच स्टेडियम में नहीं है। इस बारे में हमने विभाग के आला अफसरों को प्रस्ताव भेजा हुआ है। उम्मीद है जिले को जल्द ही हॉकी कोच मिल जाएगा। फिलहाल सीनियर हॉकी प्लेयर जूनियर को प्रेक्टिस करवा रहे हैं।
-अरूणकांत, जिला खेल अधिकारी, अंबाला
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ये तो तीनों भाइयों की कहानी है, ऐसे और भी अच्छे हॉकी प्लेयर रहे हैं, जिन्होंने हॉकी को अपना पूरा समय दिया और बुलंदी को छुआ है। लेकिन आज तक इन खिलाडिय़ों को कोई खास प्रोत्साहन नहीं मिला। सरकार को चाहिए कि स्टेट व नेशनल चैंपियन रहे खिलाड़ियों को छोटी-मोटी ही सही स्टेट गर्वनमेंट में खेल कोटे में नौकरी जरूर दे। दूसरी विडंबना यह है कि अभी तक स्टेडियम में कोई हॉकी कोच ही नहीं है। अब बताओ इस तरह कैसे हॉकी के अच्छे खिलाड़ी तैयार होंगे।
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-एसएस मान, तीनों खिलाड़ी भाइयों के कोच
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