स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन सख्त हो गया है। प्रशासन ने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे दो माह के अंदर स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस सिस्टम लगवाएं। यदि आदेशों पर अमल नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अन्य नियमों पर भी प्रशासन की पूरी नजर रहेगी। स्कूली बसों की खामियों को लेकर अमर उजाला ने 8 जुलाई के अंक में विस्तार से समाचार प्रकाशित किया था जिस पर प्रशासन ने यह संज्ञान लिया है।
ये है बसों की वर्तमान स्थिति
जिले के निजी स्कूलों में बच्चों के लिए बसें लगाई गई हैं। सुरक्षित स्कूल वाहन योजना के तहत नियम तय किए गए हैं, लेकिन इन नियमों पर शायद ही कोई बस खरा उतरती है। इसी को लेकर कईं बार चेकिंग भी हुई, लेकिन इसके बावजूद हालातों में कोई फर्क नहीं आया। इसी को लेकर अब जिला प्रशासन ने स्कूल संचालकों को नियम पूरा करने के लिए दो माह का समय दिया है।
ये दिए हैं निर्देश
इस संबंध में जिला प्रशासन ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी स्कूलों की बसों में दो महीने के अंदर जीपीएस सिस्टम और एचडी सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे ऐसे हों, जिनमें कम से कम 30 दिन तक का डाटा रिकॉर्ड करने की क्षमता हो, जबकि जिला से गुजरने वाली ऐसी बसों पर भी यह नियम लागू होंगे।
प्राइवेट वाहनों से भी है बच्चों को खतरा
जिला प्रशासन द्वारा यह निर्देश जारी तो किए गए हैं, लेकिन प्राइवेट वाहनों की संख्या अच्छी खासी है, जो बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने में लगे हैं। यह वाहन सारे नियम कानून तोड़कर बच्चों को ढो रहे हैं, लेकिन इन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले साहा में हुए हादसे में भी इसी तरह से क्षमता से अधिक बच्चों को बिठा रखा था, जिसमें कईं जानें गई थी। लेकिन इसके बावजूद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सेना के वाहनों को लेकर स्थिति साफ नहीं
अंबाला के कईं स्कूलों में सेना के वाहन भी लगे हैं। सुरक्षित स्कूल वाहन योजना के तहत सेना के इन वाहनों को लेकर क्या नियम हैं, इसकी स्थिति साफ नहीं है। अंबाला में अभी तक इस ओर प्रशासन ने कुछ भी ध्यान नहीं दिया है। इन वाहनों में जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी लगेंगे या नहीं, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। इसी तरह रोडवेज की बसें भी कुछ स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रही हैं, जबकि इन बसों को लेकर क्या स्थिति रहेगी, उस पर भी कुछ साफ नहीं है।
यह चाहती है जनता
स्कूली बसों के लिए तय किए गए नियम पूरे होने चाहिएं। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। सबसे पहले यह जिम्मेदारी स्कूल की है कि वह बसों के नियम पूरे करें। इसके बाद यदि नियम पूरे नहीं होते तो प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करे।
- आनंद मोहन शुक्ला, समाज सेवी
यदि नियम बनाए गए हैं तो उसे पूरा करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्कूल बसें जिस भी विभाग के तहत आती हैं, उस विभाग को यह सब देखना चाहिए। यदि अनुशासन और नियम के अनुसार काम किया जाता है तो चूक होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं।
- करनैल सिंह, एक्स सर्विसमैन अंबाला
बच्चों के लिए सुरक्षित वाहन योजना के तहत सारे नियम पूरे करने जरूरी हैं। इसके लिए आयोग की टीम ने भी कईं बार स्कूल बसों का निरीक्षण तक किया है, जिनमें काफी खामियां पाई गई। इसकी रिपोर्ट भी अधिकारियों को दी गई। प्रशासन द्वारा सीसीटीवी कैमरों व जीपीएस सिस्टम लगाने के निर्देश सराहनीय है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पुख्ता होगी और अभिभावकों को भी अपने बच्चों के बारे में सूचना मिलती रहेगी।
- परमजीत सिंह बडौला, सदस्य हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
------------
स्कूल बसों में स्कूल जाते समय अथवा स्कूलों के अन्य टूर के समय बच्चों के सफर के दौरान माता-पिता चिंतित रहते हैं। कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं कि बस चलाते समय चालक और परिचालक धूम्रपान करते हैं और बस चलाते समय लापरवाही भी करते हैं। सुरक्षित स्कूल वाहन योजना के तहत बसों में जीपीएस सिस्टम और अच्छी गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए स्कूल बसों के संचालकों को दो माह का समय दिया गया है। इसके बाद चेकिंग होगी और खामियां पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रभजोत सिंह, डीसी अंबाला