माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी जितेंद्र अहलावत के समय से पहले किए गए तबादला आदेश को रद कर दिया है। कैट की ओर से जारी इस तबादला आदेश को मनमाना, अवैध और वैधानिक नियमों के विपरीत करार दिया गया है। जितेंद्र अहलावत 2010 बैच हरियाणा कैडर के आईएफएस अधिकारी हैं, जो अंबाला में वन संरक्षक (उत्तर सर्किल) के पद पर तैनात थे। 13 अगस्त को उनका तबादला अंबाला से वन संरक्षक निगरानी एवं मूल्यांकन करनाल कर दिया गया था। इसके विरोध में अधिकारी कैट में चले गए थे। उन्होंने अपनी पोस्टिंग के केवल पांच महीने बाद ही किए गए इस तबादले को चुनौती दी थी।
कैट के सामने उन्होंने तर्क दिया कि यह इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (कैडर) नियम का उल्लंघन है। इन नियमों के तहत, एक आईएफएस अधिकारी के लिए कैडर पोस्ट पर न्यूनतम दो साल का कार्यकाल निर्धारित है। साथ ही, समय से पहले तबादले के लिए सिविल सेवा बोर्ड की सिफारिश अनिवार्य है। कैट के सदस्य (न्यायिक) रमेश सिंह ठाकुर की पीठ ने 17 अक्टूबर को आदेश सुनाया। न्यायाधिकरण ने पाया कि अधिकारी ने न्यूनतम दो साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया था और सीएसबी द्वारा कोई विशिष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया है। न्यायाधिकरण ने 13 अगस्त के तबादला आदेश को रद और निरस्त कर दिया। प्रतिवादी हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वे आवेदक को नियमों के अनुसार उनके अंबाला स्थित वर्तमान पोस्टिंग पर कार्यकाल पूरा करने दें।
सरकार ने यह दी थीं दलीलें
हरियाणा सरकार ने अदालत में तर्क दिया था कि तबादला लोक सेवा की आवश्यकताओं और प्रशासनिक जरूरतों के तहत जारी किया गया था। उनका यह भी कहना था कि अंबाला में वन संरक्षक (उत्तर सर्किल) का पद अत्यधिक संवेदनशील है। हाल के वर्षों में पोस्टिंग की अवधि कम रही है, इसलिए दो साल के कार्यकाल से पहले तबादले का दावा निराधार है। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी ने यह तथ्य छुपाया कि उनकी पदोन्नति और चयन ग्रेड में देरी उनके खिलाफ लंबित विजिलेंस जांच के कारण हुई थी। हालांकि, कैट ने अपने अंतिम आदेश में तबादले को रद करने का आधार नियमों का उल्लंघन और प्रक्रिया में खामी को बताया।