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पूर्व मंत्री समेत कारोबारियों पर केस दर्ज

Sun, 17 Jan 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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हाईकोर्ट के आदेश पर म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) की  कार्रवाई का विरोध करना नेताओं और कारोबारियों को महंगा पड़ गया। काफी कशमकश के बाद एमसीए अफसरों ने आखिरकार नेताओं और कारोबारियों पर केस दर्ज  करवा दिया है। इतना ही नहीं धरना देने वाले नेताओं के साथ-साथ उनके समर्थकों पर भी केस दर्ज किया गया है। इसी को लेकर शुक्रवार से ही ये कशमकश बनी हुई थी। इन नेताओं में कांग्रेस के पूर्व मंत्री एवं मौजूदा प्रदेश सचिव निर्मल सिंह, समेत उनके समर्थक, इनेलो नेता और उनके समर्थक शामिल है। पुलिस ने फिलहाल बिल्डिंग इंस्पेक्टर तेजिंद्र सिंह की शिकायत पर पूर्व मंत्री व कांग्रेस के प्रदेश सचिव निर्मल सिंह, ओंकार सिंह, ब्रह्मपाल राणा, मोहित कुमार, सोनू, कारोबारी विनोद जौहर, रविंद्र कुमार, सतीश कुमार  समेत अन्यों के खिलाफ आईपीसी की धाराएं 143, 146, 186, 188, 332, 353, 341  के तहत केस दर्ज कर लिया है।
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शुक्रवार को ही बन गई थी एफआईआर की पृष्ठभूमि
दरअसल,  कांग्रेसी और इनेलो नेताओं पर शिकंजा कसने की पृष्ठभूमि शुक्रवार को उसी  वक्त बन गई थी, जब हाईकोर्ट के आदेशों पर अवैध कब्जे गिराने की एमसीए की कार्रवाई के विरोध में राजनीति शुरू हुई थी। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने  के लिए कांग्रेस व इनेलो नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ कैंट की कपड़ा-हनुमान मार्केट चौक पर पहुंच गए और वहां पहले तो प्लास्टिक की  कुर्सियां बिछाकर सड़क के बीचोंबीच बैठ गए। उसके बाद जैसे-जैसे समर्थकों और दुकानदारों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे सड़कों पर दरियां बिछाकर धरना शुरू हो गई।
हाईकोर्ट की तौहीन नहीं की, विज के दबाव में दर्ज हुआ केस : पूर्व मंत्री
इस मामले में पूर्व मंत्री एवं प्रदेश सचिव निर्मल सिंह ने कहा कि उन्होंने,  उनके समर्थकों और कारोबारियों ने किसी ने भी हाईकोर्ट के आदेशों की तौहीन नहीं की है। ये मुकदमा सिर्फ मंत्री अनिल विज के दबाव में दर्ज किया गया  है। पूर्व मंत्री ने कहा कि कारोबारियों ने उन्हें स्थिति देखने के लिए बुलाया था, इसलिए वे वहां गए थे, उन्होंने न तो किसी को भड़काया और न ही समर्थकों को जुटने का आह्वान किया। उन्होंने एमसीए अफसरों को सिर्फ इतना  कहा था कि कब्जे हटवाने से पहले वे पैमाइश करवा लें, जबकि हाईकोर्ट ने भी  यही आदेश दिए थे, लेकिन अफसर बिना पैमाइश के जेसीबी से कब्जे हटवाना चाहते थे। पूर्व मंत्री के अनुसार अफसर ये सुनकर वापस लौट गए और शाम को एसडीएम ने आकर उनकी बात को जायज ठहराते हुए पैमाइश शुरू करवा दी। पूर्व मंत्री ने  कहा कि इसमें प्रशासन से तो कोई टकराव नहीं हुआ, एसडीएम ने जब बात को जायज  माना तभी तो बाजारों में पैमाइश की जा रही है। पूर्व मंत्री ने कहा कि  मंत्री अनिल विज उनसे  राजनीतिक रंजिश रखते हैं। इसलिए इस घटना के करीब एक दिन बाद पुलिस और एमसीए अफसरों पर दबाव बनाकर उन्होंने उनपर, उनके समर्थकों व कारोबारियों पर केस दर्ज करवाया है। वे अदालत का सम्मान करते हैं और सम्मन होते ही खुद अदालत  में पेश हो जाएंगे।
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पूर्व मंत्री समेत आठ लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया है। उन पर हाईकोर्ट के आदेेेेशों पर हो रही कार्रवाई में बाधा डालने और सरकारी अफसरों व कर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने का आरोप है।
-जश्नदीप सिंह रंधाना, डीसीपी-
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सुबह ही एमसीएम की टीम को बाजार में घुसने ही नहीं  दिया गया, जबकि एमसीए कमिश्नर अजय सिंह तोमर के साथ भी बहसबाजी कर उनपर दबाव बनाकर उन्हें मौके से लौटने पर मजबूर कर दिया गया। सुबह से लेकर शाम तक  धरना जारी रहा। जबकि जेसीबी, होमगार्ड, कमांडों व पुलिस जवानों की फोर्स  लेकर एमसीए अफसर बाजारों में ही खड़े रहे। शाम को डीसी द्वारा प्रेषित  एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह नेताओं और कारोबारियों से बातचीत कर हाईकोर्ट के  आदेशों में दखल न देने की अपील करते हुए आराम से पैमाइश करवाने की गुजारिश  की। एसडीएम ने दुकानदारों को बताया कि जिनके पास अपने दुकान वैध साबित करते  कागज है, वो एमसीए की टीम को दिखाकर अपने-अपने वैधानिक कब्जे की पैमाइश  करवाता रहे।
एसडीएम ने ये भी इशारा कर दिया था कि हाईकोर्ट के  आदेशों की अवहेलना नेताओं और दुकानदारों को महंगी पड़ सकती है। अंतत: दिनभर  हंगामा और हड़ताल करने के बाद नेता और कारोबारी धरने से उठ गए। जिसके बाद  बाजारों में अवैध कब्जों की पैमाइश शुरू की गई, जो कि शनिवार तक चली।  शनिवार को तमाम बाजारों में उनके अवैध कब्जों की पैमाइश कर वहां लाल रंग का  निशान लगा दिया गया। इस दौरान कारोबारियों ने चुपचाप एमसीए कर्मियों को  पैमाइश करने दी।
कारोबारियों ने पुराने  नोटिस लौटाए
एमसीए ने  इस पैमाइश के दौरान अवैध कब्जों को खुद ही हटाने संबंधित नोटिस भी  दुकानदारों को बांटें। लेकिन ये नोटिस 14 जनवरी को तैयार किए गए थे। इस पर  कारोबारियों ने ऐतराज जताते हुए कहा कि जब पैमाइश 16 जनवरी को हुई है, तो  इसी पैमाइश के मुताबिक उन्हे फ्रेश नोटिस दिए जाएं। इस पर एमसीए अफसरों ने  नोटिस वापस लेने को कहा और एमसीए की बिल्डिंग ब्रांच के कर्मियों को तुरंत  नए नोटिस कारोबारियों को थमाने के निर्देश दिए। यानी अब जल्द ही नए नोटिस  दुकानदारों के हाथों में होंगे। जिसमें उन्हे जल्द खुद ही कब्जे हटवाने के  आदेश दिए गए हैं, वरना उसके बाद एमसीए जेसीबी मशीनों द्वारा इन कब्जों को  हटवाएगा।
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