अंबाला। तोपखाना परेड में 21 एकड़ जमीन पर कब्जा लेने पहुंची कैंटोनमेंट बोर्ड सहित पुलिस टीम का स्थानीय निवासियों ने विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि वो तीन पीढि़यों से इस जमीन पर खेती करके गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन कैंटोनमेंट बोर्ड उन्हें बर्बाद करने पर तुला हुआ है। स्थानीय निवासियों ने बोर्ड की कार्रवाई का विरोध करते हुए रास्ता पूरी तरह से जाम कर दिया। इस दौरान बुजुर्गाें व युवाओं के साथ महिलाएं भी मौके पर डटी रहीं।
कैंटोनमेंट बोर्ड की टीम ने 21 एकड़ पर तारबंदी करने के लिए पुलिस का सहयोग लिया था। टीम सुबह लगभग 10 बजे तोपखाना परेड में पहुंच गई, हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध के चलते टीम जमीन तक नहीं पहुंच पाई। इस दौरान सभी ने बोर्ड की कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया। इस दौरान कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारी को स्थानीय लोगों ने बताया कि एक अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई है। इसका जो भी फैसला होगा,वो उन्हें मंजूर होगा। इस संबंध में बकायदा स्थानीय निवासियों ने बोर्ड अधिकारी को लिखित में भी आश्वासन दिया।
यह था मामला
दो जुलाई को कैंटोनमेंट बोर्ड ने तोपखाना की लगभग 21 एकड़ पर कब्जा लिया था। इस जमीन पर वर्षों पहले अंग्रेजों ने श्रमिकों को बसाया था और उन्हें खेती के लिए यह जमीन दी थी। इसके बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने अंग्रेजों के कार्यकाल के बाद अपने अधीन ले लिया और इसे स्थानीय निवासियों को छह हजार की लीज पर दे दिया गया लेकिन धीरे-धीरे लीज की राशि को बढ़ाया गया जोकि 40 हजार प्रति एकड़ तक पहुंच गई जो खेतिहर मजूदरों के लिए चुकाना नामुमकिन हो गया। इसके बाद यह राशि 90 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस राशि की प्राप्ति के लिए बोर्ड ने कोर्ट में याचिका दायर की और इसका फैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया था।
30 हजार लोगों की आजीविका का साधन
तोपखाना परेड में जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। यह काफी पुराना है। इस जमीन से तोपखाना परेड के लगभग 30 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इस जमीन पर स्थानीय निवासी फल व सब्जियां आदि उगाते आ रहे हैं। लेकिन अब उनकी आजीविका का यह साधन छीनने वाला है। इसे लेकर उनकी मानसिक व शारीरिक पीड़ा बढ़ गई है। उनकी आखिरी उम्मीद हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है।
कैबिनेट मंत्री से लगाई गुहार
कैंटोनमेंट बोर्ड की तारबंदी की कार्रवाई को लेकर जहां पहले लोग तोपखाना परेड में डटे रहे तो वहीं वो टीम के जाते ही कैबिनेट मंत्री अनिल विज के आवास पर पहुंच गए। यहां उनके दो नुमाइंदों ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की और उन्हें मौखिक व लिखित रूप में अपनी पीड़ा बताई। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनसे जो भी बन पड़ेगा वो किया जाएगा ताकि स्थानीय निवासियों की जमीन बची रहे।
तोपखाना परेड की लगभग 21 एकड़ जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड की है। दो जुलाई को जमीन खाली करवा ली गई थी। वीरवार को तारबंदी के लिए गए थे तो स्थानीय निवासियों ने आग्रह किया था कि हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई है। इसलिए उन्हें एक अगस्त तक का समय दिया जाए। उन्होंने लिखित रूप में यह दिया है, इसलिए उन्हें समय दिया गया है। इसके बाद बोर्ड पुलिस के साथ मिलकर अपनी कार्रवाई करेगा।
- राहुल आनंद शर्मा, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।