- कोरोना रक्षक पॉलिसी का क्लेम खारिज करने पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को 2.81 लाख रुपये चुकाने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी की ओर से कोरोना क्लेम को दस्तावेजों में विसंगति बताकर खारिज करने को अनुचित ठहराया और शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल या डॉक्टर के रिकॉर्ड में कोई विसंगति है तो उसके लिए मरीज को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने बीमा कंपनी को दो लाख 81 हजार रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
बदरपुर गांव निवासी भूषण कुमार ने फरवरी 2021 में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से 2.50 लाख रुपये में कोरोना रक्षक बीमा पॉलिसी ली थी। मार्च 2021 में भूषण कुमार कोरोना संक्रमित पाए गए और उन्हें करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहां वे 31 मार्च से 3 अप्रैल तक उपचाराधीन रहे। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब उन्होंने क्लेम के लिए आवेदन किया तो कंपनी ने जून 2021 में यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अस्पताल के रिकॉर्ड रुढ़िबद्ध लिखावट में हैं और मरीज की नैदानिक स्थिति तथा रिपोर्ट के बीच मेल नहीं है। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने कंपनी के सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा- पॉलिसी बेचते समय झूठे आश्वासन देती हैं कंपनियां
अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि दस्तावेजों में कोई हेरफेर या गलत बयानी की गई थी। आयोग ने टिप्पणी की कि आजकल बीमा कंपनियां पॉलिसी बेचते समय झूठे आश्वासन देती हैं, लेकिन क्लेम के समय बहाने बनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है। आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस को आदेश दिए कि वह शिकायतकर्ता को बीमा राशि के 2.50 लाख रुपये का भुगतान करे। कंपनी को यह राशि क्लेम खारिज होने की तारीख (22 जून 2021) से भुगतान तक नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देनी होगी। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये और कानूनी कार्रवाई के खर्च के रूप में 11 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिए। कंपनी को इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने का समय दिया है।