उद्यमी बोले- स्वदेशी उत्पाद होने के बावजूद सरकारी खरीद में उन्हें नहीं मिल पा रही वरीयता
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। वोकल फॉर लोकल का नारा अंबाला के साइंस कारोबारियों को अधिक फायदा नहीं दे पा रहा है। जमीनी स्तर पर विज्ञान के उपकरणों के कारोबारियों के लिए राह मुश्किल दिख रही है। इसका प्रमुख कारण स्वदेशी उत्पाद होने के बावजूद सरकारी खरीद में उन्हें वरीयता नहीं मिल पा रही है। अगर सरकार जैम पोर्टल पर कोई साइंस उत्पाद खरीद का ऑर्डर निकालती है तो ट्रेडर्स उस बोली को जीत ले रहे हैं। ट्रेडर्स दूसरे देशों से सस्ती गुणवत्ता के उत्पाद मंगाकर बाजार की जरूरत को पूरा कर देते हैं।
दूसरी तरफ स्थानीय कारोबारी अच्छे उत्पाद तैयार करने पर भी इस प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर हो जा रहे हैं। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन (असीमा) ने वित्त मंत्रालय से मांग भी की है कि सरकारी खरीद में स्थानीय उत्पादों को वरीयता दी जाए। मगर इस पर अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है। हमारे उत्पाद विशेषकर चीनी उत्पादों की प्राइस वॉर के सामने टिक नहीं पा रहे हैं।
माइक्रोस्कोप में अधिक देखने को मिल रहे हालात
उद्योग संचालकों ने चिंता जताई है कि कई सरकारी प्रयोगशालाओं और शिक्षण संस्थानों की खरीद में बड़े पैमाने पर हल्के माइक्रोस्कोप और अन्य वैज्ञानिक उपकरण पहुंच रहे हैं। स्थानीय निर्माताओं का आरोप है कि ये चीनी उत्पाद कम कीमत के कारण सरकारी निविदाओं में आसानी से जगह बना लेते हैं। हालांकि, इनकी टिकाऊ क्षमता और सटीकता भारतीय मानकों की तुलना में अक्सर संदिग्ध होती है।
उलझा रहा जैम पोर्टल
असीमा के महासचिव उमाकांत बताते हैं कि जैम पोर्टल पर स्थानीय उद्योग संचालकों के लिए काम करना आसान नहीं है। लंबी चौड़ी कागजी प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। इसके साथ ही बिना जानकारी के पोर्टल पर उत्पादों की श्रेणी बदल दी जाती है। उनकी विशेषताओं में भी बदलाव आता रहता है। ऐसे में स्थानीय उद्योग संचालकों में से कुछ ही हैं जो सरकारी खरीद में भाग ले पाते हैं। जबकि इसे सरकार को आसान बनाना चाहिए। इसके लिए हमने सरकार को एक रीप्रजेंटेशन भी दी थी ताकि प्रक्रिया आसान बने।