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Ambala News: पीतल के कान्हा बने श्रद्धालुओं की पहली पसंद, सिलिकॉन की मूर्तियां भी भा रहीं

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चिट्टा मंदिर रोड पर सजे कान्हा जी के वस्त्र, झूले व अन्य सज्जा का सामान। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जन्माष्टमी के लिए शहर के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी लड्डू गोपाल के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कान्हा जी की मूर्तियों, पोशाक और शृंगार सामग्री की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है। इस बार बाजार में तांबा, पीतल, कांसा, अष्टधातु और सिलिकॉन से बनी आकर्षक मूर्तियां उपलब्ध हैं। इनमें पीतल की मूर्तियां श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनी हुई हैं जबकि सिलिकॉन की मूर्तियों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
राधे राधे के संचालक बोबी, किशोरी कलेक्शन के संचालक शुभम, वृंदावन शृंगार पैलेस के संचालक अंकित और किशोरी पोशाक भंडार के संचालक दुष्यंत चौहान ने बताया कि पहले श्रद्धालु मुख्य रूप से पीतल और अष्टधातु की पारंपरिक मूर्तियां खरीदते थे। अब लोगों की पसंद में बदलाव आया है। श्रद्धालु पूजा के साथ मूर्ति के आकर्षक स्वरूप और डिजाइन को भी महत्व दे रहे हैं। यही कारण है कि बाजार में कान्हा जी की अलग-अलग आकार और डिजाइन की मूर्तियां उपलब्ध हैं।
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व्यापारियों के अनुसार, पीतल की मूर्तियों की चमक और पारंपरिक रूप लोगों को सबसे अधिक आकर्षित करता है। घर के मंदिर के लिए लोग छोटे आकार की पीतल की मूर्तियां खरीद रहे हैं। वहीं, मुलायम और सुंदर स्वरूप के कारण छोटे लड्डू गोपाल के लिए सिलिकॉन की मूर्तियां भी पसंद की जा रही हैं। कांसे, तांबे और अष्टधातु की मूर्तियां भी बाजार में उपलब्ध हैं। कुछ श्रद्धालु धार्मिक परंपरा और धातु की विशेषता को ध्यान में रखते हुए इनका चयन कर रहे हैं।
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शृंगार सामग्री की भी बढ़ी मांग
दुकानदारों के अनुसार, कान्हा जी की मूर्तियों के साथ उनके शृंगार का सामान भी खूब बिक रहा है। मुकुट, पोशाक, बांसुरी, माला, झूला, पालना और अन्य सजावटी सामान की मांग बढ़ गई है। श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार कान्हा जी को सजाने के लिए खरीदारी कर रहे हैं। बाजारों में जन्माष्टमी की रौनक बढ़ने के साथ दुकानदारों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है।
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