आने वाला धुंध भरा सीजन सड़कों पर वाहन चालकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। सड़कों पर खतरा पसरा हुआ है, जबकि अभी तक इस पर कोई खास काम नहीं किया गया है। ट्रैफिक लाइट काम नहीं कर रही हैं, जबकि कहीं पर शार्प मोड़ हैं, लेकिन यहां पर संकेतक नहीं लगाए गए हैं। कहीं पर सड़क के एक दम साथ सटे गहरे गड्ढे हैं, तो कहीं पर बीच सड़क गड्ढे बने हुए हैं।
यह है स्थिति
जिला अंबाला का अरबन एरिया आने वाले धुंध भरे सीजन में सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इन एरिया में सुविधाएं दी गई हैं, इसके बावजूद धुंध भरे दिनों में सुरक्षा के लिहाज से कुछ नहीं किया गया है। कई हिस्से तो ऐसे हैं, जहां पर हादसों का इतना अधिक खतरा है, जबकि प्रशासन इस ओर ध्यान ही नहीं देता। जिला सड़क सुरक्षा सप्ताह हर माह में बैठक की जाती है। इसमें हर बिंदू पर बातचीत होती है, लेकिन इनको अमलीजामा नहीं पहनाया जाता। यही कारण है कि लगातार धुंध भरे दिनों में खतरा बढ़ता है, जबकि कई बार हादसे हो चुके हैं।
इस कारण से बढ़ा है खतरा
- चौराहों पर ट्रैफिक लाइट हैं, लेकिन यह काम ही नहीं करती
- शार्प टर्न वाली सड़क पर संकेतक नहीं हैं, जबकि सामने से आता वाहन दिखता नहीं
- हाइवे पर लोगों द्वारा बनाए गए कट बंद नहीं किए गए हैं, जबकि यहीं से हादसों का खतरा है
- हाइवे के किनारे गहरे गड्ढे हैं, जो धुंध भरे दिनों में दिखाई नहीं देखते, जिससे हादसों की आशंका बढ़ती है
- सड़कों के किनारों पर कई जगहों से पट्टी गायब है, जो रात में दिखती तक नहीं हैं
- सड़कों के बीच रेडियम लाइट नहीं है। इसके कारण वाहन चालकों को धुंध में मोड़ आदि का पता नहीं चलता
- हाइवे पर आने वाले पुल पर रेलिंग भी गायब हैं, जिससे खतरा और बढ़ रहा है
ग्रामीण इलाकों में रोड सेफ्टी हाशिये पर
ग्रामीण इलाकों में तो रोड सेफ्टी पूरी तरह से हाशिये पर है। इन रास्तों पर न तो लाइट है और नही कहीं पर स्पीड ब्रेकर दिखाई देता है। इतना ही नहीं सड़कों पर तो संकेतक हैं और ही कोई साइन बोर्ड है। धुंध भरे दिनों में ग्रामीण इलाकों में वाहन चलाना ही मुश्किल है, जबकि इस ओर तो अभी तक कोई ध्यान तक नहीं दिया गया है। हालांकि शाम होने के बाद ग्रामीण सड़कों पर ट्रैफिक न के बराबर होता है, लेकिन धुंध भरे दिनों में वाहन चलाना ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मुश्किल भरा है।
यह कहते हैं लोग
कैंट के रहने वाले पुष्कर, अमित कुमार, स्नेहपाल, पंकज रस्तोगी, जितेंद्र, रोहित बाजवा, हेमंत शर्मा, अशोक कुमार का कहना है कि धुंध भरे दिनों में तो हाइवे सहित अन्य सड़कों पर वाहन चलाना मुश्किल ही नहीं खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन द्वारा दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं किया जाता। धुंध में कई हादसे होते रहते हैं, जबकि यह कम नहीं हो रहा है। हां, कुछ संस्थाएं शिविर आदि लगाकर वाहनों पर रेडियम टेप तो लगाती हैं, लेकिन सड़कों के किनारों पर कुछ नहीं लगाया जाता।
सड़क किनारे और बीच में गड्ढे
मुलाना। अंबाला-जगाधरी मार्ग पर सड़क किनारे बने गड्ढे वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। ये गड्ढे मुलाना में मारकंड़ा पुल के पास मोड़ पर सड़क किनारों से बिलकुल सटे हुए हैं। लगभग एक साल से इन गड्ढों की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। ताज्जुब की बात तो यह हैं कि अभी कुछ दिन पहले विभाग ने नेशनल हाइवे 73 पर पैच वर्क का कार्य किया था, जबकि सड़क किनारे बने गड्ढों को ज्यों का त्यों का छोड़ दिया। यहां तक की इन गड्ढों पर विभाग की तरफ से कोई चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया गया हैं। वाहन चालक आयुष, नवीन व मनीष ने बताया कि ये गड्डे रोड के इतना नजदीक हैं कि रात के समय वाहन का इन गढ्ढों में गिरने का भय बना रहता है।
इसी तरह मुलाना एमएमयू मार्ग से माता बाला सुंदरी मंदिर जाने वाली सड़क पर बना गढ्ढा किसी भी हादसे का कारण बन सकता है। गड्ढा लगभग 20 दिन पहले सड़क धंसने के कारण बना था, लेकिन पंचायत प्रशासन की लापरवाही के चलते यह गड्ढा बढ़ता गया। राहगीर रमेश, मोहन व शंकर ने बताया कि यह गड्ढा सड़क के बीचोबीच बना हुआ हैं, जिससे यहां पर कोई भी अनहोनी होने की संभावना है। रात को यहां से गुजरना तो खतरे से खाली ही नहीं है, जबकि धुंध भरे दिनों में तो खतरा और अधिक है।
ट्रैफिक रेगुलेशन के लिए पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है। इसके अलावा आने वाले धुंध भरे सीजन में वाहनों पर रेडियम टेप लगवाई जाएंगी, ताकि धुंध में हादसों से बचा जा सके। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं भी करवाई जाएंगी, जबकि लोग भी ऐसे दिनों में थोड़ा संभलकर चलें।
- जसबीर सिंह, एसएचओ ट्रैफिक