अंबाला सिटी। चीनी के दामों में चल रही अस्थिरता की वजह से चीनी में कड़वाहट घुलने लगी है। कारोबारियों ने जहां अपने गोदाम चीनी की बोरियों से भरने शुरू कर दिए हैं, वहीं मिलों में भी स्टॉक जमा करवाना शुरू कर दिया है।
कारोबारी मिलों में ही चीनी की एडवांस बुकिंग करवाकर कर रहे हैं। पेमेंट भी एडवांस में ही की जा रही है। मिलों से तो कारोबारी चीनी को कंट्रोल रेट पर ही खरीद रहे हैं, लेकिन गोदामों से आगे रेटों में मनमर्जी से इजाफा किया जा रहा है। अंबाला में चीनी का थोक काम करने वाले कारोबारियों की संख्या दो दर्जन के करीब है।
अंबाला में एक ही चीनी मिल नारायणगढ़ के बनौंदी में स्थित है। इस साल इस मिल में 4.31 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया। फिलहाल मिल में काम बंद है। बताया जा रहा है कि चीनी का सारा स्टॉक तो जारी हो चुका है, लेकिन अभी भी मिल में 23 हजार क्विंटल चीनी स्टॉक में हैं। जानकारी के अनुसार मिलों से तो करीब 3400 रुपये प्रति क्विंटल चीनी बेची जा रही है, मगर कारोबारी आगे इसे 3800 से 4100 रुपये प्रति क्विंटल तक बेच रहे हैं। कई कारोबारियों ने तो जमाखोरी भी शुरू कर दी है। इस मिल से अंबाला, चंडीगढ़ व पंजाब के कारोबारी चीनी खरीदते हैं। अंबाला के कारोबारी उत्तरप्रदेश, यमुनानगर और शाहाबाद की चीनी मिलों से भी चीनी मंगवाते हैं।
केंद्र ने तो चीनी के दाम में दो रुपये का इजाफा किया है लेकिन यहां कारोबारियों की मिलीभगत के चलते चीनी के दाम बाजारों से 3 से 4 रुपये तक बढ़ाए जा रहे हैं। समाज सेवी बलभद्र देव थापर, रिटायर्ड एसआई नरेंद्र सिंह के अनुसार डीसी अंबाला को चाहिए कि वे सभी चीनी कारोबारियों के गोदाम में छापे मरवाकर जमाखोरी को रोकें। साथ ही किस के पास कितना स्टॉक है और वे किस रेट से खरीदा गया है, इस बात की भी जांच करवाएं।