अंबाला। गोविंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्तों ने ज्ञान प्राप्त किया। चित्रकूट से आए कथा व्यास आचार्य अश्विनी महाराज ने कथा के माध्यम से भगवान की महिमा का गुणगान किया।
उन्होंने बताया कि भागवत मुक्ति ग्रंथ है, जो मनुष्य को जीते जी काम, क्रोध, लोभ, मोह, तृष्णा, आदि वासनाओं से मुक्त कर भगवत स्वरूप को उपलब्ध करवाता है। भागवत, भगवान का साक्षात विग्रह , मूर्ति और स्वरूप है। जैसे मंदिर में पत्थर की प्रतिमा, लकड़ी की प्रतिमा या किसी धातु विशेष की मूर्ति, सभी की ओर से किसी न किसी रूप या स्वरूप में पूजी जाती है।
इस प्रकार भागवत भी भगवान श्री कृष्ण का बांगमय शब्द में शब्द प्रतिमा मूर्ति ही है। इसलिए 18 पुराणों में भागवत पुराण को सर्वश्रेष्ठ पुराण माना गया है।
व्यास आचार्य श्री अश्विनी महाराज ने कथा विस्तार के माध्यम से बताया कि भागवत पुराण में परीक्षित के 6 प्रश्नों में जीवन, मृत्यु, आत्मा, परमात्मा और मोक्ष से संबंधित गहरे प्रश्न शामिल थे। जिनके उत्तर शुकदेव ऋषि ने भागवत पुराण के माध्यम से दिए। कथा के दौरान महाभारत प्रसंग, जामवंत-हनुमान प्रसंग के साथ-साथ धार्मिक भजन सोते-सोते में निकल गई सारी जिंदगी, भोगों भोगों में निकल गई सारी जिंदगी, गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है, धीरे-धीरे आया बुढ़ापा-डगमग डोले काया आदि से कथा हाल को भक्तिमय बना दिया। सभा के प्रधान दिनेश बहल, महासचिव रमेश धीमान, अध्यक्ष सतीश चंद्र दुआ, ओम प्रकाश शर्मा सहित काफी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।