- साहा खंड के राजकीय माध्यमिक विद्यालय पंजैल स्कूल की छात्राओं ने बयां किया दर्द
हिमांशू
साहा। जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर साहा खंड के राजकीय माध्यमिक विद्यालय पंजैल स्कूल की छात्राओं का सोमवार को दर्द फूट पड़ा। वहां के हालात दिखाते हुए बच्चियां बोलीं- शिक्षा मंत्री हमारी सुनिए। स्कूल की पानी की टंकी में कीड़े और चमगादड़ पड़े रहते हैं, इसका पानी पीने के लिए मजबूर हैं। बच्चियों के लिए बनाए शौचालयों में पानी नहीं है, जिस शौचालय में पानी का प्रबंध है, वहां ताला लटका रहता है।
इतना ही नहीं दो शिक्षकों के सहारे छह से आठवीं तक की कक्षा चल रही है। कई बार तो एक ही शिक्षक रहता है। विज्ञान और गणित सहित अन्य विषयों के हमारे पास शिक्षक नहीं हैं। सोमवार को भी एक शिक्षिका सुनीता ही स्कूल संभाल रहीं थी, दूसरे शिक्षक की प्राइमरी स्कूल में ड्यूटी लगा दी गई, क्योंकि वहां के शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी देने गए हैं।
सरपंच बोले- वीडियो बनाया फिर भी नहीं जागा विभाग
बजीदपुर के सरपंच विक्रम ने बताया कि स्कूल के हालात काफी खराब हैं। बच्चों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। बच्चियों के शौचालय में पानी का प्रबंध नहीं हैं, जिस शौचालय में प्रबंध है वहां पर ताला लटका रहता है। बच्चों का इस स्कूल में पढ़ना मुश्किल हो गया है। प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपील है कि कम से कम बच्चों के लिए स्वच्छ पानी का तो इंतजाम कर दो। अध्यापकों की कमी को लेकर भी मैंने एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था मगर विभाग या प्रशासनिक अमले ने देखने की कोशिश तक नहीं की।
शिक्षिका सुनीता ने बताया कि स्कूल में 44 बच्चे हैं। शिक्षक एक ही हैं वह भी पीटीआई हैं। मिलजुलकर बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करते हैं। स्कूल में 5 शिक्षकों की जरूरत हैं। प्राइमरी के शिक्षक की बीएलओ में ड्यूटी लगी है तो यहां से एक शिक्षक की ड्यूटी वहां लगा दी गई है। अभी अकेले ही स्कूल संभालना पड़ रहा है।
हमें भविष्य की चिंता
छात्रा रिया ने कहा कि स्कूल में हमारे पास शिक्षक होने चाहिए। स्कूल के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। शिक्षक भी अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं, हमें हमेशा हमारे भविष्य की चिंता लगी रहती है।
शिक्षक विभागीय काम में रहते हैं व्यस्त
छात्रा हरप्रीत ने बताया कि वह बजीदपुर गांव की निवासी हैं। स्कूल में शिक्षक कम हैं। पहले जब हम छठी कक्षा में आए तो विज्ञान और गणित के शिक्षक थे हिंदी के नहीं थे, अब विज्ञान और गणित के शिक्षक भी चले गए हैं। अब एसएसटी की ही शिक्षक बची हैं। जो शिक्षक हैं वह भी विभागीय काम में व्यस्त रहते हैं, उन्हें पढ़ाने का कम ही समय मिलता है।
पानी की टंकी में गंदगी। संवाद- फोटो : संस्थान
पानी की टंकी में गंदगी। संवाद- फोटो : संस्थान
पानी की टंकी में गंदगी। संवाद- फोटो : संस्थान
पानी की टंकी में गंदगी। संवाद- फोटो : संस्थान