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कुछ ही घंटे में खत्म हो गए छोटे नोट, लोगों की हुई बैंक स्टाफ से बहसबाजी

Fri, 11 Nov 2016 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
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लाोग
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अंबाला कैंट। पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बदलने और डिपॉजिट करने के पहले दिन वीरवार को लोग खासे परेशान हुए। छोटे नोट कुछ ही घंटों में खत्म हो गए, जबकि बड़े नोट बैंकों में दोपहर तक नहीं पहुंचे। इससे कई बैंकों में भड़के लोगों की अधिकारियों से बहस तक हो गई। कुछ बैंकों ने तो पुलिस कर्मियों की मदद भी ली।
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पुराने नोट जमा करवाने और नए नोट हासिल करने की प्रक्रिया के पहले दिन करेंसी बदलने को लेकर मामला बिगड़ गया। सुबह के कुछ घंटों तक तो बैंकों में पुराने नोट बदल कर दिए गए, लेकिन धीरे-धीरे बैंकों में छोटे नोटों का स्टाक भी खत्म होने लगा। उपभोक्ताओं ने बैंकों में नोट बदलने के लिए फार्म मांगे, लेकिन बैंक कर्मियों ने डिपाजिट करने पर जोर दिया। कर्मचारियों के पास छोटे नोटों का जो स्टाक था, वह निकाल दिया गया, जबकि नई करेंसी बैंकों में नहीं पहुंची।
कैंट के रवि कनौजिया, भूपिंदर सिंह, रामलाल, कृष्ण आनंद ने बताया कि बच्चों को स्कूल छोड़कर नगदी लेकर बैंक पहुंच गए, लेकिन बैंकों के बाहर मेले जैसी स्थिति थी। कैंट के निकलसन रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक आफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक के बाहर तो लाइनें सड़कों तक पहुंच गईं, जो ग्यारह बजे के बाद कम हुईं।
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कई लोगों ने वीरवार को पुरानी करेंसी बदलने या फिर एक्सचेंज करने के लिए दफ्तर से छुट्टी ले ली। कैंट के राजीव बंसल, रोहित गर्ग, पंकज मल्होत्रा, दीपक आनंद ने बताया कि वे एचडीएफसी बैंक में रुपये जमा करवाने के लिए आए थे, लेकिन लाइन इतनी अधिक है कि दो घंटे तक तो नंबर ही नहीं आया। इसी के चलते अब दो-तीन दिनों के बाद देखेंगे, जबकि दफ्तर से छुट्टी के लिए कह दिया था।

डाकघरों में देरी से पहुंची नगदी
नोटों को बदलवाने के लिए ग्राहकों का जमावड़ा तो लग गया, लेकिन डाक विभाग ने काम को सुचारु करने के लिए पहले अपने स्तर पर ही ग्राहकों के नोट बदले। संबंधित बैंकों से कैश समय पर न पहुंचने के कारण डाकघरों में सुबह के समय ही छोटे नोटों की कमी हो गई। इसके बाद उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी। उसके बाद डाकघरों में पैसा पहुंचने पर काम को सुचारु किया गया। उधर, ग्रामीण इलाकों के डाकघरों में लोग सिर्फ अपना रुपया जमा करवा सकते हैं, जबकि एक्सचेंज के लिए करेंसी पूरी नहीं है।
नोट को लेकर टिकट काउंटर पर हुई बहस
रेलवे स्टेशन पर टिकट लेने पहुंची एक महिला के पास पांच सौ का नोट होने पर महिला व टिकट काउंटर पर तैनात महिला कर्मचारी में बहस हो गई। जैसे ही मौके पर मौजूदा सीआईए कर्मी ने महिला कर्मचारी की बात पर ऐतराज जताया तो दोनों में बहस हो गई। देखते ही देखते यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। इसके बाद रेलवे सीआईए के कर्मी ने तुरंत आलाधिकारियों को मामले से अवगत करवाया। उसके बाद मामला शांत हुआ।

समय से पहले बंद हुआ कामकाज, हंगामा
कैंट के राय मार्केट स्थित बैंक आफ इंडिया में सायं पांच बजे ही काम बंद कर दिया, जबकि निर्देश हैं कि छह बजे तक काम होगा। इसी को लेकर बैंक कर्मी ने गेट बंद कर दिया, जबकि उपभोक्ता बाहर खड़े रहे। पहले तो इन उपभोक्ताओं ने बैंक खोलने को कहा, लेकिन गेट नहीं खोला गया। इसी को लेकर उपभोक्ताओं ने हंगामा किया।


ग्रामीण क्षेत्रों में रही भागदौड़
- जिले के गांवों में लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर करेंसी बदलवानी पड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी करेंसी बदलवाने या फिर डिपाजिट करवाने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ी। जिले में करीब 430 गांव आते हैं, जबकि अधिकतर गांवों में बैंकिंग सुविधा नहीं है। करेंसी बदलवाने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर तक जाना पड़ा और बैंक या डाकघरों में भी कई घंटे तक इंतजार करते रहे।
ग्रामीण जोध जिसंह, पंकज रंधावा, दिनेश बेदी, सूरज प्रकाश, मलकीत सिंह, कुलविंदर, संतोष, हरजीत, बनारसी, पाला राम, बिक्रम सिंह का कहना है कि गांवों में बैंकिंग काफी दूर-दूर तक है। यही कारण है कि गांवों में लोगों को करेंसी बदलने के लिए दूर तक जाना पड़ा।
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घबरायें नहीं आज से मिलेगी राहत : एलबीएम
लीड बैंक मैनेजर नरेश सिंगला ने कहा कि लोग घबराएं नहीं। शुक्रवार से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी। वीरवार को सिर्फ बैंक के सहारे ही लोग रहे हैं, जबकि शुक्रवार से एटीएम भी वर्किंग करना शुरू कर देंगे। रूटीन के खर्च के लिए एटीएम से पैसा निकाल सकते हैं, जबकि जमा करवाने क लिए सुबह आठ से शाम छह बजे तक का समय है। इसके अलावा शनिवार और रविवार को भी बैंक वर्किंग करेंगे। धीरे-धीरे नई करेंसी सर्कुलेट हो जाएगी और इससे स्थिति सामान्य होगी। गांवों में भी व्यवस्थाएं दी गई हैं। नई करेंसी आ गई है और बैंकों में सर्कुलेट कर दी है। यह निर्णय लोगों की बेहतरी व देश हित में है, जिसमें जनता भी थोड़ा सहयोग करें।
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