माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन यानी वीबीजीरामजी में जिले के 51230 सक्रिय श्रमिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें 125 दिन काम मिलेगा और वेतन स्लैब भी 14 दिन के बजाय सात दिन का होगा। हालांकि अधिकारियों को सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार है।
डीआरडीए अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने से पहले आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब मजदूरों को चार श्रेणियों में 125 दिनों तक काम देने की योजना है, जबकि वेतन भुगतान के नियमों में भी संशोधन किया जाएगा।
पहले 14 दिन के वेतन स्लैब के स्थान पर अब 7 दिन का स्लैब लागू करने की तैयारी है। इससे मजदूरों को भुगतान जल्दी मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से उनकी प्रमुख मांग रही है।
जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो मनरेगा का दायरा काफी व्यापक है। करनाल में अब तक 1,19,106 जॉब कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कुल पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 2,04,620 है, जिनमें 1,13,996 महिलाएं शामिल हैं। सक्रिय श्रमिकों की संख्या 51,230 है, जबकि इनमें 33,296 महिलाएं कार्यरत हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है।
इन चार श्रेणियों में मिलेगा काम
डीआरडीए की पीओ अमिता ने बताया कि मनरेगा के तहत कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें जल संरक्षण से जुड़े कार्य, जैसे तालाब (पौंड) और सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में ग्रामीण बुनियादी ढांचे (रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर) के कार्य होंगे। तीसरी श्रेणी स्वयं सहायता समूहों से संबंधित गतिविधियों की है, जबकि चौथी श्रेणी प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े कार्यों को समाहित करती है। इन श्रेणियों के माध्यम से रोजगार के अवसरों को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और ग्राम सचिवों को दे रहे प्रशिक्षण
योजना के क्रियान्वयन को लेकर जिला, खंड और ग्राम स्तर पर अधिकारियों, कर्मचारियों, सरपंचों और ग्राम सचिवों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि योजना बिना किसी बाधा के लागू हो सके। नई योजना में रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा। आधुनिक तकनीक के जरिए श्रमिकों को समय पर काम और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कार्यस्थलों की निगरानी और भुगतान व्यवस्था को भी और मजबूत किया जाएगा।