अंबाला। लंबित मांगों के समर्थन में आशा वर्कर्स यूनियन का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। आशा वर्कर्स यूनियन ने सोमवार को अंबाला सिटी सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर लंबित मांगों पर नारेबाजी कर रोष जताया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी रेनू बेरी को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने 21 जुलाई को पंचकूला में एनएचएम महानिदेशक कार्यालय पर राज्य स्तरीय प्रदर्शन का फैसला लिया है।
यूनियन की जिला प्रधान सर्वजीत कौर व सचिव कविता शर्मा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 में आशा वर्कर्स के मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी, जिसे विभाग ने अभी तक लागू नहीं किया है। उन्होंने मांग की कि इस बढ़ोतरी को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए, इसके अलावा एनएचएम को एक स्थायी स्वास्थ्य कार्यक्रम घोषित कर आशा व फैसिलिटेटर्स को श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए, इसके अलावा पेंशन व्यवस्था लागू होने तक आशा वर्कर्स को रिटायर न किया जाए व मैटरनिटी लीव के साथ-साथ सालाना 20 छुट्टियां दी जाएं व चारों लेबर कोड को रद्द कर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर तुरंत रोक लगे।