अंबाला सिटी। मिस यू पापा-मम्मी। मैं यहां इंजीनियर बनने आई थी। मैं ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती थी। लेकिन मजबूरी में
ऐसा करना पड़ रहा है। इसीलिए सॉरी। मेरी सहेली मेरे साथ हास्टल रूम में रहती थी वह छात्रावास छोड़कर जा चुकी है। वही
मेरी एकमात्र सहेली थी। उसने मुझसे बातचीत बंद कर रखी है। मैं खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही हूं। यहां माता-पिता का सपना पूरा करने आई थी। वह नहीं कर पाई। मेेरे पिता ने मेरी पढ़ाई पर बहुत खर्च किया। मैं उनका सपना भी पूरा नहीं कर पाऊंगी। मिस यू भाई। अपने आठ पेज के सुसाइड नोट में कुछ ऐसी ही बात लिखी थी गुरुकुल कन्या छात्रावास में आत्महत्या करने वाली 12वीं कक्षा की बिहार की रहने वाली छात्रा रुचि ने। रुचि का भाई सोनीपत में 10वीं में पढ़ता है। रुचि ने सुसाइड नोट चार-पांच दिन पहले ही लिखना शुरू कर दिया था। रुचि की आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद वीरवार रात परिजन अंबाला पहुंचे थे। शुक्रवार को गमगीन माहौल में उसका पोस्टमार्टम करवा बिसरा मधुबन भेज दिया।
कपड़े पर गिरी मिली आलआउट
रुचि की जेब से दो ऑलआउट की बोतलें मिली थी। जब उसे फंदे से उतारा गया तो इस दौरान वह जेब से गिर गई थी। इतना ही नहीं उसके कपड़ों पर भी ऑलआउट गिरी थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों व पुलिस के मुताबिक फंदे पर लटकने से पहले शायद उसने इनका सेवन भी किया। लेकिन इसकी पुष्टि बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
5 सितंबर सुबह 4 बजे परिजनों को मिली सूचना
मृतक रुचि के फूफा रघुनाथ प्रसाद गुप्ता ने बताया कि उनके पास 5 सितंबर की सुबह फोन गया था कि आपकी बेटी ने सुसाइड कर लिया है। लेकिन हमें विश्वास ही नहीं हुआ। हमारी बेटी पढ़ने में भी अच्छी थी कभी कोई शिकायत नहीं आई। घर में यही बेटी थी। छोटा बेटा सोनीपत में पढ़ रहा है। हमें किसी पर शक नहीं है। सुसाइड नोट में किसी का नाम नहीं है न ही हमें किसी से कोई शिकायत है।