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Ambala News: हाईटेंशन लाइन से बेटी के साथ झुलसी व्यवस्था

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वैभव शर्मा
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अंबाला। अंबाला-जगाधरी राजमार्ग पर स्थित खुड्डा कलां में पौने तीन साल की हंशिका का हाईटेंशन लाइन की चपेट में आना एक बड़ा हादसा बन गया है। हंशिका की हालत यह है कि वह इस घटना से इतना सहम गई है कि लोगों को देखकर भी रोने लगती है।

इस मामले में सिस्टम ने पीड़िता के पिता के साथ इतना भद्दा मजाक किया कि उनकी आंखें भर आती हैं। पहले तो 36 दिन तक अपनी बेटी के इलाज और सरकारी कार्यालयों के पीड़ित चक्कर काटता रहा। शिकायत दी तो पुलिस परिजनों और अधिकारियों में बात कराने के लिए मध्यस्थता करती रही। आरोप है कि पुलिस अधिकारी तफ्तीश के लिए गया तो छत पर खड़े होकर परिजनाें की लापरवाही गिनाता रहा। इसके साथ ही घटना से तीन महीने पहले पीड़िता के दादा बिजली निगम के दफ्तर में इस समस्या के लिए शिकायत दी थी। इसके बावजूद अफसरों ने लापरवाही की।
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इस पूरे मामले के हर पहलू पर पीड़ित परिवार के साथ सिस्टम ने खिलवाड़ किया। इसके बाद सिस्टम से हार मानने के बाद परिजन गृहमंत्री अनिल विज के घर गए तो 36 दिन के बाद एफआईआर दर्ज हुई। गौरतलब है कि 14 अगस्त को खुड्डा कलां में पौने तीन साल की बच्ची हिमांशी को हाईटेंशन लाइन ने चपेट में लिया था। इस मामले में वीरवार के महेश नगर थाना में जेई और एसडीओ के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज हुआ।

पहला नहीं है यह हादसा

पीड़ित बच्ची के पिता उधम सिंह बताते हैं कि वर्ष 1992 में उनके पिता ने खुड्डा कलां में घर बनाया था। वह खुद प्राइवेट नौकरी करते हैं। यहां 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन गुजर रही थी। इससे इतना खतरा नहीं था। मगर करीब 10 साल पहले बिजली निगम ने लाइन को सहारा देने के लिए एक खंभा लगा दिया। जो कुछ समय बाद झुक गया। वर्ष 2013 में उनकी शादी हुई। इसके दो साल बाद उनकी पत्नी एक दिन छत पर गईं और वह भी लाइन की चपेट में आकर घायल हो गईं। यहां तक कि झटके से उनके घर का बिजली का सामान खाक हो गया।

पीड़िता के दादा ने दी थी शिकायत

पोल को लगातार झुकता देख उनके घर में करंट आने लगा। यहां तक कि दीवारों में भी करंट रहता था। बारिश के दिनों में कुछ भी छूने से डर लगता था। हारकर पीड़ित बच्ची के दादा जगदीश लाल ने जून में बिजली निगम के महेश नगर के दफ्तर में एक शिकायत दी। मगर विभागीय लोग इस मामले को घुमाते रहे। यहां तारों पर पाइप तक नहीं थी। पीड़ित से लाइन हटाने के 40 हजार रुपये मांगते रहे। 14 अगस्त को परिवार का डर सही साबित हुआ। खेलते समय पौन तीन साल की हिमांशी झुलस गई।

पुलिस जांच में भी उड़ाया मजाक

परिजन बताते हैं कि 15 अगस्त को महेश नगर थाने में शिकायत दी। बच्ची का फोटो भी दिखाया। शिकायत ले ली मगर रिसीविंग नहीं दी। कहने लगे कि विभाग के अधिकारी और आपको आमने-सामने बैठा देंगे। 14 अगस्त से 24 अगस्त तक किसी ने पीड़ित परिसर से सुध नहीं ली। पीड़ित का आरोप है कि इससे पहले तफ्तीश के लिए एक पुलिस अधिकारी लगभग 30 अगस्त को उनके घर आए तो छत पर चढ़कर हाथ उठाकर कहने लगे कि देखो मुझे तो करंट नहीं लग रहा है जरूर आपकी बेटी तार के पास गई होगी। यह देखकर परिजनों का गला सूख गया। यहां तक कि पीड़ित परिवार ने बेटी के सिर में लगी चोट और मौके पर उखड़े बाल भी दिखाए मगर उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।

गृहमंत्री के पास जाकर मिला समाधान

इसके बाद परिजनों को पता लगा कि उनकी बेटी की एमएलआर कटवाने में वे लेट हो गए हैं। किसी ने एमएलआर नहीं काटी तो उन्होंने गृहमंत्री अनिल विज के यहां गुहार लगाई, जिसके बाद वहां से सीएमओ कार्यालय में फोन किया। तब जाकर पीड़ित बच्ची की एमएलआर कटी। परिजन एसपी के सामने पेश हुए। एसपी ने मामले की जिम्मेदारी कैंट के डीएसपी को दी। तब जाकर यह मामला पूरे 36 दिन बाद दर्ज हुआ।
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देते रहे तारीख पर तारीख

इस मामले में जब पुलिस ने अधिकारियों से पीड़ित परिवार का आमना सामने कराने की बात कही तब भी परिवार ने अधिकारियों का काफी इंतजार किाय। कभी एक सितंबर की तारीख दी तो कभी कोई और। मगर अधिकारी हर बार न मिलने के बहाने खोजते दिखे।
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