अंबाला में शंभू बॉर्डर पर पंजाब के किसान पुलिस से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। जिसके कारण किसानों को मोर्चे पर डटे रहने में मदद मिली है। किसानों को बॉर्डर पर रोकने के लिए सुरक्षा बल भी हर प्रकार के हथकंडे अपना रहे हैं।
आंसू गैस के गोले दागने के लिए हरियाणा पुलिस की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे 10 लाख रुपये की कीमत के ड्रोन को पंजाब के किसानों की 10 रुपये की पतंग ने रोक दिया। किसानों की पतंगों ने ड्रोन को रोका ही नहीं बल्कि हरियाणा की तरफ पीछे धकेल दिया।
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दरअसल दिल्ली कूच के पहले दिन प्रदर्शनकारी किसानों को पंजाब क्षेत्र में ही रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने ड्रोन की मदद से आंसू गैस के गोले दागे थे। इससे किसान परेशान हुए। एक रात में ही किसानों ने ड्रोन का तोड़ निकाल लिया। किसानों ने बुधवार को सुबह होते ही पतंगें उड़ानी शुरू कर दीं। सभी ने यह सोचा कि वसंत पंचमी पर पतंग उड़ाई जा रही हैं।
हुआ यूं कि हरियाणा की तरफ से आने वाले ड्रोन इन पतंगों की वजह से रुक गए। एक ड्रोन एक बार तो आंदोलनकारी किसानों के ऊपर तक पहुंच भी गया। एक किसान ने पतंग के मांझे को ड्रोन में फंसा दिया। ऐसे में किस्मत अच्छी रही कि ड्रोन जैसे-तैसे बचकर निकल गया। ड्रोन को दो बार पुलिस ने उड़ाने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिल सकी।
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रबर की गोलियों से बचने को पहने बॉडी प्रोटेक्टर
एक दिन पहले कई किसान पुलिस की रबर की गोलियों से जख्मी हुए थे। बुधवार को किसान बॉडी प्रोटेक्टर पहनकर मोर्चे पर उतरे। बॉडी प्रोटेक्टरों की मदद से वह रबर की गोलियों से बच गए। सिर्फ इतना ही नहीं पुलिस की वाटर कैनन से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने पीपीई सूट तक पहन रखा था। वहीं आंसू गैस से बचने को चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी का लेप और बार-बार नमक चखा जा रहा था। इसके साथ ही किसानों को मास्क, चश्मे आदि भी वितरित किए जा रहे थे। इन सब की वजह किसानों को मोर्चे पर डटे रहने में मदद मिली।
अत्यधिक क्षमता के पंखे और स्प्रिंकलर लेकर उतरे
किसानों को मंगलवार को जहां आंसू गैस के गोलों ने काफी प्रभावित किया था, वहीं बुधवार को किसान विभिन्न प्रकार के उपकरण लेकर उतरते दिखाई दिए। अत्यधिक क्षमता वाले पंखों की मदद से आंसू गैस को हरियाणा पुलिस की तरफ किया। वहीं बड़े-बड़े पानी के टैंकरों और स्प्रिंकलर की मदद लेकर आंसू गैस के प्रभाव को पानी की बौछारों से निष्क्रिय किया।