एक ओर जहां सरहदों पर चीन की हरकतों से देश की टेंशन बढ़ी रहती है, वहीं अंबाला में देश की सबसे बड़ी साइंस सिटी को भी चीन से बड़ा खतरा सताने लगा है।
चीन ने अंबाला साइंस इंडस्ट्री के विदेशी मार्केट पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।
पिछले साल जहां चीन ने अंबाला साइंस इंडस्ट्री से एक बड़ा विदेशी ऑर्डर छीन लिया था, वहीं इस साल भी साइंस उद्यमियों को चीन से फिर खतरा सता रहा है।
हालांकि इसके लिए साइंस उद्यमी भी अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं, लेकिन चीन की चुनौतियों से पार पाना साइंस इंडस्ट्री के लिए थोड़ा मुश्किल रहेगा।
इस तरह है साइंस सिटी को खतरा
दरअसल, चीन ने अब विभिन्न आइटमों के साथ-साथ साइंस संबंधित शैक्षणिक उपकरणों का निर्माण भी बड़े पैमाने पर बनाना शुरू कर दिया है।
कई दशक पहले ये शैक्षणिक उपकरण चीन में भी अंबाला से ही सप्लाई किए जाते थे, लेकिन अब पिछले कुछ सालों से चीन ने भी इस काम में अपनी जोर आजमाइश शुरू कर दी है।
पिछले साल अंबाला की साइंस सिटी को जबरदस्त झटका देते हुए 100 करोड़ के विदेशी आर्डर अंबाला साइंस इंडस्ट्री से छीन लिए।
इसके लिए चीन की मजबूत मार्केटिंग और समुदायिक मैन्युफेक्चरिंग से घटी लागत एक बड़ी वजह रही।
अंबाला साइंस सिटी के प्रयास
अंबाला में साइंस उद्यमियों ये कोशिश कर रहे हैं कि यहां एक बड़ा कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जाए, जहां अंबाला के शैक्षणिका उपकरणों की क्वालिटी को बढ़ाया जाए और उसकी लागत को कम करने का प्रयास किया जाए।
‘बिखराव’ भी चिंता का विषय
इस वक्त साइंस सिटी में छोटे-बड़े उद्यमियों की दूरी और आपसी बिखराव साइंस सिटी के लिए बड़ी चिंता का विषय है। खैर, एसोसिएशनस इस बिखराव को खत्म करने का प्रयास कर रही है।
चीन से साइंस सिटी को एक बड़ा खतरा है, लेकिन इसके लिए प्रयास किया जा रहा है कि सभी उद्यमियों से मंथन कर इस कंपीटिशन से लड़ा जाए। इसके लिए मैं खुद चीन विजिट करके आया हूं।
- राजीव अग्रवाल, सचिव, दि साइंस अपरेट्स मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन