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रेलवे की आमदनी हुई कम, 115 को भुगतना पड़ा खामियाजा

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रेलवे ने कोरोना काल के दौरान राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए बिना जानकारी व नोटिस दिए बगैर 115 प्राइवेट सफाई कर्मचारियों को सेवा मुक्त कर दिया। सभी कर्मचारियों ने नौकरी बचाने की गुहार लगाई, लेकिन नियमों और आदेशों की पालना में बंधे अधिकारी चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर पाए।
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कर्मचारियों ने रोष जताते हुए बताया कि वह लॉकडाउन के दौरान भी जानजोखिम में डालकर लगातार सफाई कार्य करते रहे, अब हालात ऐसे हैं कि कोरोना के कारण काम-धंधे चौपट हो गए हैं। वह स्टेशन पर सफाई कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, अब ऐसे हालात में कहां जाएं।
रोष जताते हुए फैलाया कचरा
स्टेशन पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों को जैसे ही जानकारी मिली कि उनकी नौकरी चली गई है तो उन्होंने सभी प्लेटफार्म पर रखे डस्टबीन को गिराना शुरू कर दिया। डस्टबीन में रखी गंदगी को प्लेटफार्म और रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। कर्मचारियों की प्रत्येक गतिविधि नजदीक लगे कैमरों में कैद हो गई।
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रेलवे की तरफ से मिले पत्र में स्टाफ कम करने के निर्देश दिए गए थे। इसी कड़ी में 115 सफाई कर्मचारियों को हटाया गया है। आगामी आदेशों के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
नीरज वालित्र्या, कंपनी मैनेजर।
निर्देश मिले हैं कि सिर्फ एक तिहाई स्टाफ ही कांट्रेक्ट के आधार पर रखा जाए। स्टेशन पर सफाई का ठेका 2 साल का था जो पहले ही खत्म हो चुका है। ठेकेदार को पहले ही जानकारी दी थी।
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बीएस गिल, स्टेशन डायरेक्टर।
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