नारायणगढ़। जाट आरक्षण की मांग को लेकर शुरु हुआ आंदोलन अंबाला में कमजोर पड़ गया है। दिन भर भीड़ जुटाने के लिए जाट नेता जद्दोजहद करते रहे। रविवार को जहां करीब 35 जाट नारायणगढ़ में धरने पर बैठे वहीं सोमवार को नकी संख्या आधी ही रह गई। जाट नेताओं ने समुदाय के लोगों को आह्वान भी किया, लेकिन फिर भी सोमवार को धरने पर भीड़ ही नहीं दिख पाई।
दूसरी ओर आंदोलन के मद्देनजर पुलिस पूरी तरह से अलर्ट रही और गश्त करती रही। पुलिस ने अंबाला में आंदोलन के कमजोर पडने के बावजूद कोई ढिलाई नहीं दिखाई।
उल्लेखनीय है जाट आरक्षण की मांग को लेकर पांच जून से प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी थी।
इसी को लेकर पुलिस ने भी जिला में धारा 144 लागू कर दी थी। रविवार को इसी आंदोलन के चलते नारायणगढ़ में करीब 35 लोग धरने पर बैठे, जबकि अन्य कहीं पर भी जाटों ने कोई धरना नहीं दिया। दूसरी ओर सोमवार को नारायणगढ़ में भी जाटों ने धरना तो दिया, लेकिन इस दौरान इनकी संख्या रविवार की अपेक्षा आधी रह गई।
सोमवार को धरने पर बैठे लोगों की मांग थी की उन्हें हाल ही में दिया गया आरक्षण को लेकर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के सम्मुख जोरदार पैरवी करे, ताकि आरक्षण का लाभ मिल सके। इस दौरान जाट नेता दिन भर समुदाय के लोगों की राह देखते रहे, लेकिन ज्यादा भीड़ नहीं जुट पाई। इस दौरान कईयों से संपर्क भी किया गया, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।
करीब 15-20 लोग ही धरने पर जुट पाए। जाट नेताओं का कहना है कि जाट आरक्षण को लेकर यह धरना जारी रहेगा।
दूसरी ओर पुलिस भी सोमवार को गश्त पर रही और किसी भी प्रकार से ढील नहीं दी। नारायणगढ़ में धरना स्थल के आसपास पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे, जबकि हर गतिविधि पर नजर रखी गई। इसी तरह कैंट रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी पुलिस की गश्त जारी रही।