जिला का पहला कोरोना पॉजिटिव पंजाब के रामनगर का रहने वाला गुरप्रीत सोमवार का अस्पताल से 16वें दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। उसकी तीसरी और चौथी कोरोना सैंपल रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद विभाग ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी। इससे के बाद सीधे वह स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस से अपने घर रामनगर पहुंचा जहां पलकें बिछाए बैठे उसके माता-पिता और संयुक्त परिवार के 16 सदस्यों ने उसका स्वागत किया। इस तरह उसने अपने आत्मबल और डाक्टरों की हिदायतों की अनुपालन करते हुए कोरोना की जंग जीत ली। उसने कहा कि अंबाला के डाक्टरों की जितनी तारीफ की जाए कम है क्योंकि उनका उसके साथ व्यवहार दोस्ताना रहा। उसने बताया कि घर जाकर माता-पिता के पांव छूने हैं। पूछने पर उसने बताया कि वह पहली बार किसी प्रोजेक्ट के तहत नेपाल गया था। इससे पहले वह कभी वहां नहीं गया था। बता दें कि नेपाल से आने के बाद ही इसे खांसी, जुखाम और बुखार हुआ था और दवाई लेने के बाद जब ठीक नहीं हुआ तो वह ईलाज के लिए खुद अंबाला अस्पताल में पहुंचा था।
पहले किया सैनिटाइज, फिर डाक्टरों ने बजाई ताली: अस्पताल से डिस्चार्ज करने से पहले उसे जिला नागरिक अस्पताल के फ्लू वार्ड में सैनिटाइज किया गया। इसके बाद जैसे ही वह फ्लू वार्ड से निकला तो अंबाला स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों ने तालियां बजाकर उसका स्वागत किया। उसे हिदायतें देते हुए घर पर रहने और किसी से न मिलने की बातें बताई।
डाक्टरों ने नहीं बताया मैं कोरोना पॉजिटिव: अमर उजाला के साथ बातचीत में गुरप्रीत ने बताया कि उसे डाक्टरों ने नहीं बताया कि वह कोरोना पॉजिटिव है। बस उसे यह कहा गया कि आपको 14 दिन यहां रखा जाएगा। जब संवाददाता ने पूछा कि आपको फिर कैसे पता चला कि आपको कोरोना हो गया है तो गुरप्रीत ने कहा कि जब 14 दिन रखने के लिए कहा गया तो वह समझ गया कि वह बीमारी की चपेट में आ चुका है।
डिमांड की जरूरत तो तब पड़ती है जब कुछ न मिले : टीम अमर उजाला ने गुरप्रीत से सवाल करते हुए पूछा कि क्या इन 16 दिनों में उसने कोई डिमांड स्वास्थ्य विभाग से की। इसके जवाब में गुरप्रीत ने कहा कि डिमांड तब कि जाती है कुछ न मिलें। उसने बताया कि तीन समय अस्पताल में खाना मिलता था और दो समय चाय।
रात को नहीं था सोने का कोई समय: गुरप्रीत ने बताया कि उसका रात सोने का कोई समय नहीं था। क्योंकि दिनभर अस्पताल में रहना बड़ी मुश्किल था। वह कब सोता था नहीं पता। लेकिन सुबह 3-4 बजे जरूरी उठता था। इसके बाद फ्रेश होने के बाद वह सो जाता और छह उठता था। डाक्टर दिन में सुबह 10-11 बजे आते थे। दिनभर में सुबह-शाम दवाई लेता था।
अफवाह फैलाने वालों पर दर्ज हो केस: गुरप्रीत ने कहा कि डाक्टरों की बदौलत उसने कोरोना की जंग लड़ी। उसने अफवाह फैलाने वालों पर केस दर्ज करने की मांग भी की। कहा कि जब वह उपचाराधीन था तो सोशल मीडिया पर उसके बारे में कई तरह की अफवाह चलती रही। यहां तक की उसकी हालत गंभीर बता दी गई। जबकि किसी भी दिन उसकी हालत गंभीर नहीं हुई वह हमेशा ठीक रहा। उसने कहा कि इन्हीं अफवाहों के चलते उसके घरवालों की दिक्कतें भी बढ़ गई थी। उसने कहा कि ऐसे लोगों पर केस दर्ज होना चाहिए।