अंबाला में सेना के अधीनस्थ अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड ने वीरवार को एक करोड़ 73 लाख के घाटे का बजट पारित किया है। इसका सीधा असर सैन्य क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर पड़ने के आसार है।
इससे विकास कार्यों पर कैंची चलना लगभग तय है। बताया जा रहा है कि कैंटोनमेंट बोर्ड की आय भी अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़ नहीं पा रही है।
वीरवार को बोर्ड सदन की बैठक में सेना, बोर्ड अफसरों और सदस्यों ने इसी मुद्दे पर माथापच्ची की। इस दौरान सालाना बजट भी पास किया गया। लेकिन यह बजट पिछले साल के अपेक्षाकृत घाटे का रहा। बोर्ड सदन की अध्यक्षता कार्यवाहक आर्मी कमांडर ब्रिगेडियर आशीष उप्पल ने की।
बैठक में कैंटोनमेंट बोर्ड की मुख्य अधिशासी अधिकारी शालिनी पांडेय, बोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट वीरेंद्र कुमार गांधी, हेल्थ एंड बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन उमेश बिट्टू, ला एंड एजूकेशन कमेटी की चेयरमैन सिम्मी साहनी, वित्त कमेटी के चेयरमैन राजकुमार, बोर्ड सदस्य सूबेदार सिंह, मूर्ति देवी, जोगेंद्र कौर व राजकुमार तोपखाना भी उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने अपने-अपने इलाकों की समस्याएं रखी और एजेंडे पर चरचा की।
ऐसे बिगड़ी बोर्ड की माली हालत
- कैंटोनमेंट बोर्ड की अपनी आय लगातार घट रही है
- बोर्ड पहले ‘सेल्फ डिपेंडेंट’ कैटगरी में शामिल था और अच्छी आय से विकास का भी बढ़िया बजट बनता था
-इस साल बोर्ड को झटका लगा, आय तो कम होती गई
प्रस्तावित बजट के तहत जो भी ग्रांट हाईकमान तय करेगा, वह ही बतौर एड बोर्ड को मिलेगी
-इस बार बोर्ड ने पास किया 9.27 करोड़ का बजट, संशय की स्थिति हाईकमान पिछली बार से भी कम बजट कर सकता है पास
इस तरह तो और घटेंगे आय के स्त्रोत
कैंटोनमेंट बोर्ड ने 42 लाख की लागत से मरम्मत करवाए गए आकाश गंगा कम्यूनिटी के 14 साल बाद किराए को बढ़ाने का। बोर्ड ने अपने हिसाब से किराए की नई स्लैब तैयार की। बोर्ड का तर्क था कि इससे बोर्ड को बढ़िया आय होगी। लेकिन बोर्ड के सभी सदस्य इस पर खफा हो गए और इस मुद्दे पर खूब बहस की। आर्मी कमांडर बोर्ड सदस्यों को समझाते रहे कि किराए का स्लैब ठीक है।
मगर बोर्ड सदस्य नहीं माने। आखिरकार इस पर आर्मी कमांडर को भी प्रस्तावित नए किरायों में काफी कटौती करनी पड़ी। ऐसे ही एक मुद्दे पर बोर्ड सदस्य फिर अड़ गए। एक दुकान को अवैध निर्माण के चलते 5 माह से सील किया हुआ है। आर्मी कमांडर ने कहा कि कहा कि इस केस में 6 माह के किराए के बरामद 9 हजार रुपये पेनाल्टी लगाकर मामला सेटल किया जाए।
लेकिन इस पर बोर्ड सदस्य अड़ गए और रकम 9 हजार से 4500 रुपये करवा दी। ऐसे ही बोर्ड सदस्य उमेश बिट्टू ने तीन साल से सील पड़े बंगला नंबर 176 को ओके करने की मांग की। इस पर आर्मी कमांडर ने एक कमेटी गठित कर इस बंगले के निरीक्षण के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के बाद ही ये केस सैटल होगा और यह तय होगा कि इस पर कितनी पेनाल्टी लगानी है।
अफसर भी करते हैं लापरवाही
बोर्ड के अफसर भी बजट को साल के भीतर ही खर्च करने में थोड़ी लापरवाही करते है। इसी का नतीजा यह रहा कि पिछले दो सालों से लगातार कैंटोनमेंट बोर्ड का बजट लैप्स होता जा रहा है। एक तो पहले ही बजट में कटौती हो रही है और उसके बावजूद अफसर बोर्ड का डेवलपमेंट बजट भी पूरी तरह खर्च नहीं कर पाते। जिस वजह से विकास कार्यों के लिए आया बजट पूरी तरह खर्च नहीं हो पाता।