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अंबाला: सेंट्रल जेल में गूंजा- 'कोरोना तों बच बंदया, पता नहीं कदों किनूं लग जाना', शेरू ने लिखा गीत व दी आवाज

Sun, 23 May 2021 09:15 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला

सार

अंबाला की ऐतिहासिक सेंट्रल जेल में तिनका तिनका फाउंडेशन की जेल रेडियो की पहल रंग ला रही है। अब जेल के कैदी भी आवाज की दुनिया की कदम बढ़ा रहे हैं। 
 
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रेडियो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंबाला की केंद्रीय जेल के शेरू को जेल के रेडियो ने आवाज की दुनिया से जोड़ दिया। जेल के रेडियो ने उसे एक नई पहचान दे दी है। वह अब बन गया है- गीतकार और गायक। अंबाला केंद्रीय जेल औऱ तिनका तिनका फाउंडेशन द्वारा रविवार को जारी किए गए एक छोटे से वीडियो में शेरू की इस प्रतिभा को पेश किया गया है। 

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दरअसल शेरू ने कोरोना को लेकर जागरूकता लाने के लिए गाना लिखा है। यह गाना पंजाबी में है और इसके शुरुआती बोल हैं- 'कोरोना तों बच बंदया, पता नहीं कदों किनूं लग जाना। मुंह ते मास्क लगा ले तू, नहीं ते तूं दुनिया तो जाना।'

कौन है शेरू
40 साल का शेरू अंबाला की केंद्रीय जेल में 10 साल की सजा काट रहा है। अब तक वह साढ़े तीन साल की सजा पूरी कर चुका है। दिसंबर 2020 में राज्य की जेलों के 21 बंदियों के साथ उसका चयन भी जेल रेडियो के जॉकी के तौर पर हुआ था। उसकी दिलचस्पी गाने, लिखने और खुद गाने में ज़्यादा थी, इसलिए जेल रेडियो में उसे गानों के काम की जिम्मेदारी दी गई। 
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जेल में आने से पहले शेरू को गाने का तो शौक तो था, लेकिन उसे कभी कोई मंच नहीं मिला। जेल रेडियो की बदौलत शेरू अब गायक के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है। 

गाने का हुआ स्वागत
शेरू के इस गाने को रिलीज करते हुए जेल के अधीक्षक लखबीर सिंह ने कहा, 'सुबह के समय जब भी मैं जेल के राउंड पर निकलता हूं तो यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि सभी छह बंदी रेडियो रूम में बैठकर किसी सृजन में मग्न हैं। कोई कुछ लिख रहा होता है तो कोई रेडियो पर बात कर रहा होता है। शेरू गाने लिखने में व्यस्त दिखाई देता है। शेरू के गानों के सामने आने से बाकी बंदियों का मनोबल भी बढ़ेगा।'

इसी जेल में दी गई थी गोडसे को फांसी
अंबाला की केंद्रीय जेल देश की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक जेलों में शामिल है। 1872 में बनी यह जेल हरियाणा की तीन केंद्रीय जेलों में से एक है। इसमें वर्ष 1949 में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी दी गई थी। 1228 बंदियों की क्षमता वाली इस जेल में फिलहाल करीब 1250 बंदी हैं। इनमें 77 महिलाएं भी शामिल हैं। जेल में इस समय चार बच्चे भी अपना माताओं के साथ रह रहे हैं। 

बंदी कर रहे नए प्रयोग : वर्तिका नंदा
जेल सुधारक और हरियाणा की जेलों में रेडियो लाने की पहल करने वाली डॉ. वर्तिका नन्दा का कहना है 'जेल रेडियो ने बंदियों को खुशियां की पोटलियां दे दी हैं। अब अपनी प्रतिभा को लेकर नए प्रयोग कर रहे हैं। शेरू का गाना हम तिनका जेल रेडियो के पॉडकास्ट और स्पॉटीफाई जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर जारी कर रहे हैं। तिनका तिनका जेलों में उम्मीदों के इंद्रधनुष बनाने की कोशिश कर रहा है। यह पॉडकास्ट इंद्रधनुष का एक प्रमुख रंग है।'

हरियाणा की सभी जेलों में सुना रहे यह गाना
अंबाला जेल रेडियो के बाकी पांचों रेडियो ज़ॉकी और सभी बंदियों ने इस गाने के रिलीज पर बेहद खुशी जताई है। यह गाना हरियाणा की सभी जेलों में रेडियो के जरिए सुनाया जाएगा ताकि बाकी बंदियों को भी इससे प्रेरणा मिले।  इसके जरिए तिनका तिनका जेलों में एक पुल बना रहा है ताकि जेलें सकारात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़ सकें। 

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