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हैप्पी बर्थ-डे अंबाला, आज 54 साल का हो गया हमारा अंबाला

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हरियाणा गठन के साथ आज अंबाला भी 54वां जन्मदिन मनाएगा। एक नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर बने नए राज्य के तौर पर अस्तित्व में आए हरियाणा के गठन के साथ अंबाला जिला भी अस्त्वि में आ गया था। संयुक्त पंजाब के समय जिले की हैसियत रखने वाला प्रदेश के जिलों में अंबाला का नाम उस समय भी सबसे ऊपर था और प्रदेश गठन के 53 साल बीत जाने के बाद भी अंबाला ने अपने इतिहास और नाम को कायम रखा। हरियाणा का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस जिले का प्रदेश के विकास में शुरू से लेकर आज तक अहम योगदान रहा है। हालांकि पंचकूला व यमुनानगर दो नए जिलों के गठन के बाद अंबाला जिले का क्षेत्रफल जरूर घट गया लेकिन रुतबा आज भी जस का तस है।
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ये हैं अंबाला की शान
साइंस उद्योग, कपड़ा थोक कारोबार, मिक्सी उद्योग। इन उद्योगों में अंबाला ने न केवल प्रदेश बल्कि देशभर में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। देश को पहली मिक्सी देने वाला अंबाला ही है। अंबाला के मिक्सी उद्योग ने ही महिलाओं की रसोई में क्रांति लाने का काम किया। यहां की कपड़ा मार्केट एशिया की सबसे बड़ी कपड़ा मार्केट के रूप में विख्यात है। इस मार्केट में करीब 1100 दुकानें हैं।
कैंटोनमेंट और खड़गा टू कोर अंबाला का गौरव
अंबाला जिले की बात करें तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी प्रदेश का अहम जिला है। यहां कैंटोनमेंट बोर्ड है। सेना की खड़गा टू कोर भी अंबाला में ही है। बता दें कि पाकिस्तान से बांग्लादेश को अलग करने में इसी खड़गा टू कोर की अहम भूमिका रही थी। इसे 1985 में पश्चिम बंगाल से अंबाला में स्थापित किया गया था।
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थल सेना के साथ एयरफोर्स स्टेशन
प्रदेश का एकमात्र एयरफोर्स स्टेशन है। इसका उपयोग सैन्य और सरकारी उड़ानों के लिए किया जाता है। यह नेताओं और अन्य प्रमुख लोगों के उड़ान भरने के लिए भी उपयोग किया जाता है। अंबाला एयर फोर्स स्टेशन का निर्माण 1948 में देश स्वतंत्र होने के पश्चात किया गया था। यह नंबर 5 स्क्वाड्रन आईएएफ सैपेकैट जगुआर का घर भी है। सुखोई, जगुवार के बाद अब संभवत: इसी वर्ष यहां राफेल भी उतारा जा सकता है।
देश के कोने-कोने को जोड़ रहा रेलवे मंडल
अंबाला का रेलवे मंडल रेलवे स्टेशन नॉर्थ इंडिया को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने का काम करता है। यहां से देश के किसी भी कोने के लिए रेल सुविधा उपलब्ध है। अंबाला रेलवे जंक्शन पर 7 प्लेटफार्म हैं। देश की आजादी से पहले ही यह अस्तित्व में आ गया था। 1999-2000 में इसे विद्युतीकृत कर दिया गया था। रोजाना 220 से ज्यादा गाड़ियां अंबाला स्टेेशन से निकलती हैं।
जिले की आबादी करीब 13 लाख पार हो गई है। सुषमा स्वराज, सूरजभान, अनिल विज, जैसे शक्तिशाली नेता यहीं से निकले।
300 बेड से होगा अस्पताल का विस्तार
प्रदेश के सीएम हुकम सिंह के कार्यकाल में अपना अस्पताल नाम से जिला नागरिक अस्पताल के भवन का शिलान्यास हुआ था गत भाजपा सरकार के कार्यकाल में इसे 300 बेड बनाने की हरी झंडी दिखाते हुए शिलान्यास कर दिया गया था। इसी तरह छावनी के नागरिक अस्पताल का तो पूरी तरह से कायाकल्प हो ही चुका है। यहां पर करीब 200 करोड़ रुपये अकेले अस्पताल के भवन व सुविधाओं पर भाजपा सरकार ने खर्च किए।
पालिका से परिषद और फिर निगम से परिषद तक का सफर
1977 में अंबाला नगर पालिका अस्तित्व में आया। इसके बाद परिषद और 2010 में निगम का दर्जा मिला लेकिन 2019 में फिर अंबाला शहर और छावनी दो नए हिस्सों में बंट गया। अंबाला शहर का निगम का दर्जा बरकरार रहा छावनी को निगम से हटा नगर पालिका में तब्दील कर दिया गया। हरियाणा बना तो लोगों का मुख्य खेल फुटबॉल ही था। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे खेल स्टेडियम से एक बार फुटबाल व दूसरे खेलों को नई धार मिलने की उम्मीद बंधी है। अंबाला ने ही प्रदेश को जिम्नास्टिक में अर्जुन अवॉर्डी दिए हैं।
आज भी पहचान कायम किए है पूर्ण सिंह का ढाबा
नेशनल हाइवे पर पड़ने वाले ढाबों में अपनी अमिट छाप कायम करने वाले पूर्ण सिंह के ढाबे का आज भी नाम चलता है। इसी तरह विजय रतन चौक पर स्टैंडर्ड होटल 1937 में स्थापित हो गया था जो अभी भी चालू हालत में हैं। इसी प्रकार जैन सोडा वाटर जो शीतल पेय पदार्थों से जुड़ा रहा है।
54वें जन्मदिन से पहले मिला शिक्षा सदन
अंबाला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की शुरुआत देश की आजादी के बाद ही हो गई थी। कुछ वर्षों तक यहां पर महिला छात्रावास चलाया गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय इसे बना दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से पहले यहां जज रहते थे। उस समय अंबाला डिवीजन था और इसका एरिया शिमला तक था। उसी दौरान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पीछे बने हुए कमरों में हाथी बंधा करते थे। इन सभी कमरों को गर्म रखने के लिए यहां कोयले की भट्टियां चला करती थीं। जिन्हें बाद में वर्ष 2006-07 में वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी जिले सिंह ने तुड़वाकर इस भवन की मरम्मत कराई थी। भाजपा सरकार आई तो उसने इस भवन की जगह जिले को नया आलीशान और प्रदेश का पहला जिलास्तर पर शिक्षा सदन देने का काम किया। विधानसभा चुनाव आचार संहिता से पहले इसका शुभारंभ कर दिया गया।
जिस समय प्रदेश का गठन हुआ और अंबाला अस्तित्व में आया अंबाला जिले की सीमा पानीपत और पंजाब में रोपड़ तक थी। करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, यमुनानगर और पंचकूला सभी इसी का हिस्सा थे। संयुक्त पंजाब में अंबाला आता था। अंबाला मेें मैंने ही सबसे पहली गोपी मिक्सी बनाई जोकि देशभर में विख्यात हुई थी।
राजेंद्रनाथ, उद्योगपति
साइंस की इंडस्ट्री बड़ा बदलाव
अंबाला साइंस इंडस्ट्री का विदेशों में नाम है। ओशो और हरगोलाल जैसी साइंस फैक्ट्री में रिसर्च और शिक्षा के चलते आज साइंस उपकरण बेहतरीन क्वालिटी के तैयार हो रहे हैं। इससे रोजगार भी बढ़ा है। अंबाला साइंस का हब है। अंबाला को अब बड़े इंस्टीट्यूट की जरूरत है करनाल और पानीपत की तरह यदि यहां पर कोई बड़ा इंस्टीट्यूट आता है तो इससे यहां के कल्चर में बदलाव आएगा। चिंता की बात यह है कि अंबाला में क्राइम का ग्राफ काफी बढ़ गया है। जब वह छोटे थे तो अंबाला में कभी मर्डर नहीं सुना। अब तो मर्डर आम बात हो गई। यह गंभीर समस्या है।
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- डॉ. आशावंत, उद्यमी एवं डायरेक्ट, अंबाला कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड रिसर्च।
नई वर्ष गांठ पर यह सौगात मिलने की संभावनाएं
- 200 करोड़ की लागत से बनने वाला शहीदी स्मारक और साइंस म्यूजियम।
- 200 करोड़ की फोर लेन।
- 18 करोड़ का स्वीमिंग पूल और 18 ही करोड़ का सुभाष पार्क सौंदर्यीकरण।
- 90 करोड़ की लागत से बनने वाला अंतर्राष्ट्रीय खेल स्टेडियम
- 50 करोड़ की लागत का कैंसर अस्पताल।
- 100 करोड़ का बैंक स्क्वेयर।
- छावनी में 15 करोड़ की मल्टी लेवल पार्किंग
- छावनी में 100 से 200 बेड अस्पताल का 77 करोड़ की लागत से विस्तार।
- शहर नागरिक अस्पताल 200 से 300 बेड के अस्पताल का विस्तार
- 20 करोड़ के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की सौगात।
- शहर में 12 करोड़ की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग।
- 48 करोड़ की लागत से जगाधरी गेट पर मल्टीलेवल पार्किंग और शॉपिंग मॉल
- 100 करोड़ की लागत से लघु सचिवालय।
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