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Ambala News: शारीरिक शोषण के साथ ठगी का भी शिकार हो रहीं नाबालिग

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सुखबीर
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अंबाला सिटी। अधूरे ज्ञान और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के कारण जिले में पॉक्सो के मामले बढ़ते जा रहे है। इतना ही नहीं पॉक्सो के साथ- साथ नाबालिगों के साथ ठगी के मामले भी सामने आ रहे है। जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजीता सचदेवा ने बताया कि हर माह समिति के सामने पॉक्सो के 10 से 12 मामले सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही तीन से पांच मामले ऐसे भी देखने को मिलते है जिनमें नाबालिग के साथ ठगी होना भी पाया जा रहा है। नाबालिग अज्ञात लोगों से विभिन्न सोशल मीडिया एप के जरिए बात करती हैं और उनसे दोस्ती कर लेती है। दोस्ती के बाद नाबालिग बातों में आकर घर से रुपए व गहने भी लेकर चली जाती हैं, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है और अपने फैसले पर पछताना पड़ जाता है।
केस एक
ऑनलाइन तस्वीर भेजना पड़ा महंगा
अंबाला की रहने वाली नाबालिग लड़की की दोस्ती फरीदाबाद के रहने वाले लड़के से हो गई। लड़के ने नाबालिग को ऑनलाइन चैट से अपनी बातों में फंसा लिया और उसकी अश्लील तस्वीरें मंगवाई लेकिन तस्वीर भेजने के बाद लड़के ने नाबालिग से पैसे व गहने मांगे और नाबालिग को मजबूरन चांदी के गहने व कुछ नकदी उसे देने पड़े।
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केस दो
एप के जरिए हुई दोस्ती
अंबाला की रहने वाली नाबालिग लड़की की गाना गाने वाली एप के जरिए दोस्ती हो गई। लड़का उससे मिलने अंबाला आता था और उसके साथ संबंध बनाता था। इतना ही नहीं लड़के ने अपने दोस्तों के साथ भी संबंध बनाने को कहा लेकिन नाबालिग ने समय रहते इसकी सूचना अपने माता पिता को दी। जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।
वर्चुअल टच बताना भी जरूरी
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजीता सचदेवा ने बताया कि विभाग द्वारा समय समय पर स्कूलों में जाकर छात्राओं को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि समिति द्वारा अब स्कूलों में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को देखते हुए वर्चुअल टच के बारे में भी बताया जाएगा। जिससे किशोरियों को इंटरनेट पर हो रहे अपराधों के बारे में जागरूक किया जा सके। अभी तक वे 250 स्कूलों में गुड टच बैट टच के बारे में बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माता पिता को भी अपने बच्चों को वर्चुअल टच के बारे में बताना चाहिए। जिससे उनके बच्चे सुरक्षित तरीके से इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सके।
आर्थिक मदद भी दे रहा विभाग
बाल कल्याण विभाग की ओर से पॉक्सो के मामलों में पीड़िता को अपना रोजगार करने या फिर पढ़ाई व अन्य कोई काम करने के लिए 20 हजार रुपए तक की सहायता राशि दी जाती है। यह राशि पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिती को ध्यान में रखते हुए दी जाती है। बीते दो वर्षों में विभाग की ओर से चार लाख रुपए दिए जा चुके है। यह बजट डीसीपीओ द्वारा जारी किए जाते है।
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वर्जन
समिति के सामने जो भी मामले आते है उनमें पीड़िता की पूरी मदद कि जाती है। इसके साथ ही समय समय पर फॉलाेअप भी लिया जाता है। अगर पीड़ित को कोई भी समस्या है तो समिति उसमें भी उसकी मदद करती है।
-रंजीता सचदेवा, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति अंबाला
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