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फिर गरमाई चौधरियों की राजनीति

Fri, 11 Dec 2015 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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पढ़े-लिखे होने चाहिए पंच व सरपंच संबंधी याचिका पर वीरवार को सुप्रीम कोर्ट फिलहाल हरियाणा सरकार के साथ खड़ी नजर आई। इस मामले में वीरवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और याची दोनों का पक्ष सुनते हुए जनप्रतिनिधियों का पढ़ा-लिखा होने की बात को जायज ठहराया।
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इस फैसले के बाद भले ही याची ने फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में फिर से पुनर्विचार याचिका लगाने की बात कही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद यहां अंबाला में पंचायत चुनाव को लेकर हलचल शुरू हो गई है। दिन भर जहां गांवों में चर्चाओं का दौर जोरों पर रहा, वहीं पिछले कुछ महीनों से ठप पड़ी चौधरियों की राजनीति भी गरमा गई है। हालांकि गांव में अभी प्रचार अभियान ने तेजी नहीं पकड़ी है, लेकिन पंचायत का चुनाव लडने वालों ने अपनी कमर एक बार फिर से कस ली है। हालांकि इन प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान को गति नहीं दी है, लेकिन इन प्रत्याशियों ने बैठकों का दौर फिर से शुरू कर दिया है।


फैसले से खुशी भी और गम भी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अंबाला के गांवों में खुशी और गम दोनों स्थिति बनी रही। युवा प्रत्याशी जहां बेहद खुश है, वहीं कम पढ़े-लिखे चौधरियों को ये फैसला रास नहीं आ रहा है। दोनों पक्षों ने इस फैसले पर अपनी मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। चुनाव लडने वाले युवा प्रत्याशी सतबीर सिंह, रिंकू, सतिंद्र पाल सिंह, रेनुबाला, सुरजीत सिंह व विक्रम सिंह कहते हैं कि हरियाणा सरकार का फैसला बिल्कुल ठीक था। बिना वजह से फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई। उनके अनुसार यदि सरकार चाहती है कि जनप्रतिनिधि पढ़े-लिखे हों तो इसमें बुराई क्या है? पढ़े-लिखे जनप्रतिनिधि होंगे तो गांव को विकास की ओर उत्साह से लेकर जाएंगे। लेकिन अधेड़ प्रत्याशी खुशहार सिंह, फूल सिंह, पालाराम और बलजिंद्र सिंह का कहना है कि देश में चुनाव लडने का अधिकार सभी को है। उनके अनुसार आज कई जनप्रतिनिधी ऐसे हैं, जिन्हे गांव में पंची-सरपंची का सालों का अनुभव है। लेकिन वे अपनी शिक्षा की वजह से आज चुनाव नहीं लड़ पाएंगें, ये तो गलत बात है। उनके अनुसार वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं कि लेकिन सुप्रीम कोर्ट से निवेदन है कि वे सरकार को मजबूर करे कि विधायक और सांसद पदों पर चुनाव लडने वालों के लिए भी शैक्षणिक योग्यता निर्धारित हो।
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प्रशासन को सरकारी आदेश का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही राय स्पष्ट कर दी है, लेकिन अभी तक जिला प्रशासनिक स्तर पर इस बाबत कोई सरकारी आदेश नहीं आए हैं। हरियाणा सरकार कब तक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू करवाएगी? इस बारे में अभी सरकार की ओर से कोई निर्देश जिला मुख्यालयों के पास नहीं पहुंचे हैं। हालांकि प्रशासन ने नामांकन प्रक्रिया लगभग पूरी करवा ली थी, इतना ही नहीं पहले व दूसरे चरण के चुनाव की तारीख भी तय हो गई थी। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट में मामला पेडिंग होने की वजह से सरकार ने चुनावी प्रक्रिया को रोक दिया था।



सरकार की सोच और काम ठीक : विज
उच्चतम न्यायालय द्वारा पंचायत चुनावों को हरियाणा सरकार के पक्ष में फैसला सुनाने पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के इस फैसले से सिद्ध हो गया है कि हरियाणा सरकार की सोच और काम करने की दिशा ठीक है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर बिना वजह प्रदेश  वासियों को गुमराह कर रहा था जबकि सरकार ने प्रजातंत्र की सबसे मजबूत इकाई ग्राम पंचायतों में शिक्षित प्रतिनिधियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक सराहनीय पहल की है। जब ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि शिक्षित होंगे तो न केवल वह विकास के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं में अधिक कारगर तरीके से कार्य करेंगे बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा जनप्रतिनिधियों की अनपढ़ता के कारण किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।

राज्यमंत्री ने की सीएम के प्रयासों की सराहना
खनन, भूविज्ञान एवं अक्षय ऊर्जा राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उच्चतम न्यायालय के इस फैसले पर प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और कहा कि उन्होंने प्रजातांत्रिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक सराहनीय पहल की है। फैसले के बाद पंचायतों में पढ़े-लिखे प्रतिनिधियों के आने से ग्रामीण विकास को और अधिक गति मिलेगी तथा सरकार की मंशा के अनुरूप विभाग द्वारा जारी किए गए पूरे पैसे का सही और पारदर्शिता से इस्तेमाल हो सकेगा।

विधायकों ने किया स्वागत
विधायक असीम गोयल और विधायक श्रीमती संतोष चौहान सारवान ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल को उनके प्रयासों की जीत के लिए मुबारकबाद दी है। पंचायत चुनावों में शिक्षा की अनिवार्यता को लेकर बड़े-बड़े ब्यान देने वाले कांग्रेस सहित अन्य विपक्ष के लोगों को भी सरकार के इस फैसले की सराहना करनी चाहिए क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने की राजनीति की है।

सामने आई मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
अदालत के फैसले पर पूर्व सूचना आयुक्त एवं कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अशोक मेहता का कहना था कि देश की सर्वोच्च अदालत का फैसला सिर-माथे पर है लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा जल्दबाजी व एन चुनावों के मौके पर लिए गए इस फैसले से समाज का एक बड़ा तबका लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रह जाएगा। वहीं प्रदेश श्रम एवं निर्माण प्रसंघ के पूर्व चेयरमैन गुरपाल सिंह अकबरपुर ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक बढिय़ा कदम बताया और कहा कि इस फैसले के लागू होने से विकास कार्यों में पारदर्शिता आने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि आज के इस प्रतिस्पर्धी व आईटी युग में लोकतंत्र की इस सबसे छोटी इकाई का प्रतिनिधित्व पढ़े-लिखे व साफ छवि के लोगों के हाथों में होना जरूरी है।

408 पंचायतें होंगी प्रभावित
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनदीप सिंह बराड़ ने बताया कि पंचायत चुनाव में जिला के 408 ग्राम पंचायतों के लिए 420919 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इन मतदाताओं में 225115 पुरूष और 195804 महिला मतदाता शामिल हैं।
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