नगर निगम आयुक्त और अधिकारियों की अनुपस्थिति के बीच तीन साल बाद मेयर शक्तिरानी की अध्यक्षता में नगर निगम हाउस की बैठक हुई। पंचायत भवन में मेयर के अलावा 8 अन्य पार्षद बैठक में निर्धारित समय 11 बजे मौजूद थे। एक घंटे चली बैठक में शहर के विकास के लिए 15 मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें सफाई व्यवस्था, नगर निगम में भ्रष्टाचार, बेसहारा पशुओं के मुद्दे प्रमुख रहे। भाजपा के सभी 8 पार्षदों के अलावा हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस के दो-दो पार्षदों ने भी बैठक से दूरी बनाए रखी।
अधिकारियों की अनुपस्थिति में हुई बैठक में पार्षदों ने नगर निगम आयुक्त पर जमकर आरोप लगाए। भरे सदन के बीच पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि नगर निगम आयुक्त पिछले दो साल से मनमर्जी कर रहे हैं, जिसे अब चलने नहीं दिया जाएगा। वार्ड नंबर-5 के पार्षद राजेश मेहता ने सदन में यहां तक कह दिया कि कमिश्नर की ठगी अब यहां नहीं चलेगी। उनकी बात का समर्थन करते हुए वार्ड-12 की पार्षद अमनदीप कौर ने कहा कि निगम कमिश्नर बैठक में क्यों नहीं आए, जबकि उनके तीन-तीन बार नोटिस दिया गया। उन पर निश्चित तौर पर कार्रवाई होनी चाहिए। वह खुद को निगम के मालिक समझ रहे हैं, लेकिन उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि वह यहां नौकरी करते हैं।
पार्षद सरदूल सिंह ने कहा कि निगम आयुक्त के पास एक खसरा नंबर की फाइल के लिए गया था लेकिन उन्होंने यह जवाब दिया कि एक बार विधायक से फोन करवा दो। पार्षद सरदूल सिंह ने भी यही आरोप लगाए कि आयुक्त के पास जाते हैं तो वह यही कहते हैं विधायक से फोन करवाओ। इस पर पार्षद राजेश मेहता ने कहा कि हमें यह समझ नहीं आ रहा कि आयुक्त नगर निगम की नौकरी कर रहे हैं या विधायक की। इस पर पार्षद फकीरचंद, पार्षद जसबीर सिंह, पार्षद राकेश सिंगाला सभी ने निगम आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वार्ड 11 से पार्षद राजेंद्र कौर ने कहा कि कमिश्नर का न आना इसे करप्शन कहें या किसी का दबाव समझ नहीं आ रहा।
मेयर ने की बैठक की शुुरुआत
सुबह 11 बजकर 03 मिनट पर मेयर ने बैठक की शुरुआत की। कहा कि मैं हैरान हूं कि कोई भी अधिकारी नहीं आया। कुछ देर और प्रतीक्षा करूंगी शायद कोई आ जाए। करीब सवा 11 बजे तक प्रतीक्षा के बाद मेयर शक्तिरानी शर्मा ने कहा कि बजट फरवरी में पेश होना चाहिए। उसे फरवरी के अंत तक सरकार को भेज जाता है। बजट पेश नहीं होने से विकास कैसे होगा? वेतन कहां से देंगे? कार्य कैसे करवाएंगे? यह बहुत ही अहम था लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। नगर निगम सफाई को लेकर जब से हम आए हैं कोशिश कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। हर वार्ड से हर गली से, हर मोहल्ले से हर पार्षद की यही शिकायत आ रही है कि गली की सफाई नहीं हो रही, डोर-टू-डोर कूड़ा नहीं उठ रहा, नालियों की सफाई नहीं हो रही। आप बताएं क्या किया जा सकता है?
इस तरह दिया पार्षदों ने जवाब
वार्ड-5 के पार्षद राजेश मेहता ने इसके जवाब में कहा कि सफाई का अंबाला में बुरा हाल है। सेनेटरी इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी बनती है। इसीलिए सफाई नहीं होने पर उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। नालों के लिए अलग से लेबर की व्यवस्था भी करनी होगी। इसी बीच वार्ड एक के पार्षद जसबीर ने कहा कि मैं राजेश मेहता से सहमत हूं। सेनेटरी इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी बनती है। उन पर कार्रवाई हो। साथ ही पार्षदों के संतुष्टि पत्र के बिना ठेकेदार को पैसे न दिए जाएं। वार्ड नंबर 11 की पार्षद राजेंद्र कौर ने बैठक बुलाने के लिए मेयर का आभार जताया। कहा कि मेरे वार्ड में ज्यादातर जनता गरीब तबके से है। सफाई का बुरा हाल ह। सेनेटरी इंस्पेक्टर सुशील को कई बार फोन कर चुकी हूं लेकिन वह फोन नहीं उठाते। पता नहीं उन पर किसका प्रेशर है। सुशील पर कार्रवाई की जाए और उन्हें फोन उठाने के निर्देश दिए जाएं। वार्ड 12 की पार्षद अमनदीप कौर ने कहा कि वातावरण स्वच्छ होना जरूरी है लेकिन जहां भी जाते हैं यहां तो कूड़ा ही मिलता है। अंबाला को क्लीन सिटी का अवार्ड कैसे मिला मुझे तो हैरानी है। वार्ड 18 के पार्षद सरदूल सिंह ने कहा कि सफाई का जनाजा निकला पड़ा है। सफाई कर्मी कौन-कहां है किसी को कुछ नहीं पता। वार्ड 19 के पार्षद राकेश सिंगला ने कहा कि मेर वार्ड सेक्टर 10 में तो सभी नाले जाम हैं, सीवरेज जाम हैं। एक भी अफसर यहां नहीं हैं। होते तो उन्हें बताते कि क्या हाल है। वार्ड 2 के पार्षद फकीरचंद ने कहा कि कूड़ा नहीं उठा रहा न ही कोई काम हो रहा।