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गोद लेने के बाद आदर्श तो नहीं बना पर अनाथ हो गया

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बराड़ा। मैं गांव धीन हूं..., जब बाकी गांवों के सुधार के लिए आदर्श ग्राम योजना शुरू की गई तो मुझमें भी सांसद और उपायुक्त ने दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने मुझे औपचारिक रूप से गोद ले लिया। उस समय मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मुझे लगा कि अब मैं भी आदर्श गांव बनूंगा और मेरी एक अलग पहचान बनेगी। मेरी सारी गलियां पक्की होंगी, स्ट्रीट लाइट लगेंगी, सुंदर तालाब होगा, सामुदायिक भवन होगा और भी सभी सुविधाएं होंगी। मगर दिन बीतते गए और सुधार होने की बजाय हालात और बदतर होते चले गए।
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मेरे सारे अरमान धरे के धरे रह गए। न सांसद और न ही उपायुक्त ने मेरी तरफ दोबारा देखा। इतने साल बीत जाने के बाद भी कोई विकास नहीं हुआ। बीतते समय के साथ मैंने विकास कार्यों की उम्मीद छोड़ दी। खासकर तब जब पंचायत का कार्यकाल खत्म हो गया। उसके बाद जो थोड़े बहुत सुधार के काम हो रहे थे या होने की उम्मीद थी वह पूरी तरह ठप हो गए। सांसद और उपायुक्त मुझे अनाथों की तरह छोड़ कर चले गए। मेरे कई रास्ते अभी कच्चे पड़े हैं। पशु चिकित्सालय और व्यायामशाला के भवन बदहाल हैं। स्ट्रीट लाइटें न होने के कारण शाम होते ही गलियों में अंधेरा पसर जाता है।
सरकार सांसदों से अपडेट ले
योजना के तहत गांव का विकास होना था, परंतु नेताओं ने कोई दिलचस्पी नहीं ली है और न ही उपायुक्त ने। सोच रहे थे कि गांव भी शहर जैसे बनेंगे पर ऐसा हुआ नहीं। इसके लिए सरकार को हर सांसद से गोद लिए गांव में हुए विकास कार्यों की अपडेट लेनी चाहिए। -शेर सिंह
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नहीं हुआ कोई सुधार
केवल योजना लागू कर दी जाती है, परंतु उस पर काम नहीं होता। वैसे तो गांव के विकास के लिए बहुत सी योजनाएं लागू की गई थी, लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली। गांव में पशु चिकित्सालय बदहाल है। इसका सुधार होना चाहिए, परंतु अभी तक हुआ नहीं है। -अनिल कुमार
योजना पर अमल नहीं किया
गांव में व्यायामशाला बनाई गई थी जो देखरेख के अभाव में खस्ताहाल हो चुकी है। कम्युनिटी सेंटर का काम भी पूरा नहीं हुआ। योजना केवल बनाई गई थी। उस पर अमल नहीं किया गया। गांव को आदर्श योजना के तहत शामिल जरूर किया था। लेकिन कोई विकास कार्य नहीं हुए। -मोहित
स्ट्रीट लाइट भी नहीं
आदर्श ग्राम योजना में धीन गांव का नाम आया तो बहुत खुशी हुई। पता लगा कि इस योजना के तहत गांव को शहर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, लेकिन गांव में जो सुविधाएं हैं, वे भी देखरेख के अभाव में खस्ताहाल हो चुकी हैं। गांव में स्ट्रीट लाइट नहीं है। अंधेरा पसरा रहता है। -सुरेंद्र कुमार
पंचायत स्तर पर हुए कार्य
धीन गांव को सांसद व डीसी ने गोद लिया था। योजना के तहत कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। इसके अलावा गांव में पंचायत भवन का निर्माण हुआ है। व्यायामशाला बनवाई गई है। सामुदायिक भवन निर्माणाधीन है, लेकिन यह कार्य पंचायती स्तर पर हुए हैं। -नवनीत सैनी, निवर्तमान सरपंच
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