दो हजार रुपये का नोट देखते ही दुकानदार इसे लेने से इनकार कर रहे हैं, क्योंकि बकाया देने के लिए छोटे नोट उनके पास नहीं हैं। मार्केट में 500 और 1000 रुपये के नए नोट सर्कुलेट नहीं हो रहे हैं, जबकि बैंक भी तय राशि से कम की नकदी ग्राहकों को थमा रहे हैं। ऐसे में जनता जहां दो हजार रुपये का नया नोट लेने के बाद भी परेशान हैं, वहीं दुकानदार भी अपनी परेशानी बताकर किनारा कर रहे हैं।
बुधवार को अमर उजाला के संवादाता से ट्विनसिटी के विभिन्न बाजारों में दुकानों पर देखा कि कैसे दुकानदार 2000 रुपये के नोट से भी किनारा कर रहे हैं। दुकानदारों के पास यदि 500-600 रुपये का सामान खरीदने के बाद दो हजार रुपये थमाए जाते हैं तो भी दुकानदार के लिए परेशानी खड़ी हो रही है। दुकानदार बताते हैं कि कैसे इन दिनों छोटे नोटों की किल्लत झेलनी पड़ रही है, जबकि बाजार में छोटे नोटों का सर्कुलेशन भी काफी कम हो गया है। दो हजार रुपये का नोट लेने के बाद मजबूरन लोगों को आनन-फानन में घरों का सामान खरीदने के लिए या तो रिश्तेदारों के घर दौड़ लगानी पड़ रही है या फिर पूरी राशि व दुकानदार की शर्त के मुताबिक ही सामान खरीदना पड़ रहा है।
यह कहते हैं उपभोक्ता
दुकानों पर पहुंचने वाली सुमन ठाकुर, सरोज, शांता देवी, रजनी, रेनू बाला, रितू कश्यप, शीला रानी का कहना कि बैंकों की ओर से उन्हें 4000 के दो हजार रुपये के नोट मिले थे। लेकिन जब से ये नोट मिले हैं न तो कोई दुकानदार इसे चलाता है और न ही कोई बैंक कर्मी इसके बदले खुले पैसे देने को तैयार हैं। वह पूरे दिन से सामान के लिए भटक रही हैं और दुकानदार उन्हें सामान नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि नोटबंदी के बाद बेशक 2000 रुपये का नोट बैंकों द्वारा दिया जा रहा है, लेकिन मार्केट में छोटे नोट भी तो सर्कुलेट किए जाएं। हर कोई अपनी जरूरत के लिए इन छोटे नोटों को सोच समझकर निकाल रहा है।
विज के दरबार पर भी दिखा नोटबंदी का असर
नोटबंदी को लेकर आम जनता बैंकों और एटीएम की लाइनों में लगकर परेशान हो चुकी हैं। इसका असर बुधवार को पीडब्लूडी रेस्ट हाऊस में लगने वाले मंत्री अनिल विज के जनता दरबार पर भी दिखा। पहले कि अपेक्षा दरबार में पहुंचने वाले फरियादियों की संख्या में काफी कमी दिखाई दी। इसके चलते मंत्री अनिल विज का दरबार जल्द ही समाप्त हो गया था और फरियादी अपने घरों को लौट गए।
बैंकों के बाहर कम नहीं हो रही नोटों की टेंशन
सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले से आम जनता में नोटों की टेंशन कम होने की अपेक्षा बढ़ती जा रही है। अलसुबह से नोटों को लेकर बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की कतारें लगी रहती हैं और पूरा दिन केवल नोटों को लेकर ही आपस में बातचीत जारी रहती है। जबकि कई बैंकों द्वारा एक्सचेंज मनी को बोर्ड हटा दिए गए, जिस कारण आम जनता केवल बैंकों पर जमा पूंजी पर भी निर्भर हो चुकी है।
बैंकों के आसपास वाहन लगाने पर दुकानदार परेशान
नोटों को लेकर बैंकों के बाहर वाहन लेकर पहुंचने वाली जनता भी आसपास के दुकानदारों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। जनता लाइन में लगने के लिए बिना वाहन को पार्किंग व खाली क्षेत्र में लगाने की अपेक्षा दुकानों के बाहर ही लगाकर चले जाते हैं। इससे दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। इसी बात को लेकर अधिकतर बैंकों के बाहर जनता व दुकानदारों में वाहन लगाने को लेकर भी बहसबाजी हो रही है।
बैंकों में खाते खोलने की बढ़ी डिमांड
500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद बैंकों में नए खाते की डिमांड भी रोजाना बढ़ती जा रही है। आम जनता घरों में रखे 500 व 1000 रुपये के नोटों को खपाने के लिए खाते खुलवा रहे हैं। जबकि बैंको में तैनात खाता ओपनिंग के एजेंट भी सरकार के फैसले का जमकर लाभ उठा रहे हैं और ऐसे लोगों के अकाउंट तक खोल रहे हैं जिन्होंने कभी बैंकों के दर्शन तक नहीं किए थे। लेकिन कई बैंकों में स्टाफ की कमी होने के कारण ये खाता फिलहाल बंद कर रखे हैं और इसके चलते आम जनता को भी परेशानी हो रही है।
बैंकों में भी कैश की कमी
बुधवार को जहां एटीएम बंद रहे वहीं कई बैंकों में भी कैश की कमी रही। सिटी के पुराने दिल्ली रोड स्थित आरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में बुधवार को कैश न होने के चलते उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना पड़ा। यहां कैश लेने पहुंचे उपभोक्ताओं ने बताया कि बाहर एटीएम बंद पड़े हैं और बैंक में कैश नहीं है। वह सुबह से कई चक्कर लगा चुके हैं लेकिन हर बार बैंक कर्मचारियों द्वारा कैश नहीं होने की बात कह दी जाती है।
नहीं आए स्याही लगाने के आदेश
बुधवार से नोट बदली करवाने वालों की उंगली पर मतदाता स्याही लगाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन बुधवार को बैंकों में सरकार के आदेश और स्याही नहीं पहुंच पाने के चलते ऐसा नहीं हो सका। बिना स्याही लगाए ही नोट बदली करने का काम जारी रहा। सिटी के मॉडल टाउन स्थित पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक राजेश सिंह ने बताया कि उनके पास अभी तक उनके रिजीनल ऑफिस से कोई आदेश और स्याही नहीं पहुंची है। इसलिए अभी बिना स्याही का इस्तेमाल किए ही लोगों को नोट बदली करके दिए जा रहे हैं।
व्यापार पर पड़ रहा असर
इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है ऐसे में नोट बंदी के चलते सर्राफा कारोबारियों द्वारा लोगों को सामान न दिए जाने के चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। किसी ने गिफ्ट देने के लिए सोना खरीदना है तो किसी ने शादी के लिए तो किसी ने बच्चों के जन्मदिन पर ज्वेलरी बनवानी है लेकिन पुरानी करंसी के चलते उन्हें सामान नहीं मिल पा रहा है। सर्राफा एसोसिएशन के प्रवक्ता राजेश लूथरा की मानें तो यदि कोई व्यक्ति चेक से पेमेंट करता है या फिर नए नोट देता है तो उसे सामान दे देते हैं लेकिन पुरानी करेंसी के बदले सामान देने में उन्हें भी दिक्कत आ रही है।
दोपहर बाद दे रहे हैं कैश
कईं बैंकों में ग्राहकों को दोपहर बाद ही कैश दिया जा रहा है। लेकिन इसमें भी तय सीमा से कम ही कैश लोगों को मिल रहा है। हालांकि एक अकाउंट से 24000 रुपये निकाले जा सकते हैं, लेकिन कैश की कमी का हवाला देते हुए बैंक द्वारा उपभोक्ताओं को चार हजार रुपये तक ही दे रहा है। करंसी बदलने की लिमिट जहां साढ़े चार हजार रुपये की गई है, वहीं कईं बैंक दो हजार रुपये ही थमा रहे हैं। खास बात है कि सुबह से दोपहर तक नकदी जमा की जा रही है, जबकि दोपहर के बाद कैश उपभोक्ताओं को दे रहे हैं।