अंबाला/ शहजादपुर। शहजादपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करंट पीड़िता ललिता देवी पत्नी चमन लाल की डाक्टरों के नहीं आने के कारण तड़पकर हुई मौत मामले में पांचों डॉक्टरों पर मंत्री विज गाज गिर गई। गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने चंडीगढ़ में बताया कि पांचों डॉक्टरों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड होने वालों में डॉ. वैशाली, डॉ. यामिनी, डॉ. नरेश, डॉ. अनू और रात की ड्यूटी करके बिना किसी डॉ. के आए ड्यूटी छोड़कर गई डॉ. कीर्ति शामिल हैं।
सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह ने जांच टीम की सिफारिश पर पांचों को इस दुखद घटना का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके नाम मुख्यालय में भेज दिए थे। बेशक पांचों डाक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन मौत के बाद भी शहजादपुर की खंडहर हाल सीएचसी को करीब 7.16 करोड़ की लागत से बने नए भवन में 3 माह बाद भी शिफ्ट नहीं किया जा सका। टीम अमर उजाला ने इस बारे में पहले ही विभाग को आगाह किया था कि ऐसा नहीं करने पर मरीज की मौत कभी भी हो सकती है। लेकिन विभाग ने इसे अनदेखा कर दिया। उधर दूसरी तरफ डॉ. यामिनी की जगह रोस्टर में ड्यूटी डॉ. सुमन की थी लेकिन दोनों ने आपस में ड्यूटी चेंज कर ली थी। इसीलिए जांच टीम ने डॉ. यामिनी को ही जिम्मेदार माना और डॉ. सुमन बच गई। हालांकि रात तक अंबाला में सस्पेंड होने वाले डॉ. की आदेशों का इंतजार चल रहा था।
प्राइवेट क्लीनिक चला रही डॉ. पर भी होगी कार्रवाई
इस मामले में बेशक पांच डॉक्टर ड्यूटी से गैर हाजिर पाए गए लेकिन इनमें एक महिला डॉक्टर ऐसी भी है जोकि प्राइवेट क्लीनिकचल रही थी। ऐसे में महिला डॉक्टर पर इस कार्रवाई के अलावा एक और कार्रवाई की जा सकती है। वहीं पूरे मामले में सबसे देरी पर पहुंचने वाले सीएचसी के एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद को क्लिन चिट मिलना तय है क्योंकि उनका न तो शिकायत में नाम आया न ही जांच टीम ने उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की अनुशंसा की। सोमवार को सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह और डॉ. सुखप्रीत सीएचसी पहुंचे और पूरी स्थिति का जायजा लिया।
सारे डॉक्टर लेते हैं हाउस रेंट करते हैं बाहर से अप डाउन
टीम अमर उजाला ने 27 सितंबर के अपने संस्करण में आगाह करते हुए बताया था कि किस तरह खंडहर भवन में सीएचसी चल रही है और करोड़ों की लागत से बनी नई सीएचसी को शिफ्टिंग के लिए मरीज की मौत का इंतजार है। 25 सितंबर को सीएचसी शहजादपुर के खंडहर भवन की छत से पंखा एक महिला के ऊपर गिर गया था लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को रफा-दफा कर इसकी फाइल दबा दी। यदि सीएचसी शहजादपुर में शिफ्ट हो चुकी होती तो यह बने डाक्टर के आवास में कोई न कोई डॉक्टर मिल जाता। लेकिन सीएचसी शहजादपुर के एक-दो डॉक्टर को छोड़कर यहां के एसएमओ सहित सभी शहजादपुर से 30 किलोमीटर दूर से आते हैं और रोजाना स्टेशन छोड़ते हैं जबकि वह हाउस रेंट विभाग से नियमित तौर पर ले रहे हैं।
हमने अपनी रिपोर्ट बनाकर विभाग को भेज दी है। जो भी डॉ. इस घटना के जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ निश्चित तौर पर हर हाल में कार्रवाई होगी। सस्पेंड करने के आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुए। जहां तक सीएचसी शहजादपुर की शिफ्टिंग की बात है तो हम एक नवंबर को इसे नए भवन में शिफ्ट कर देंगे।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन।