मीरी-पीरी चौक के पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में उस समय हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब एक महिला के परिजनों ने डॉक्टर पर जबरन गर्भपात करने का आरोप लगा दिया। मौके पर सिटी थाना पुलिस को पहुंचना पड़ा। इसी बीच डॉक्टर ने परिजनों के आरोपों से इनकार किया और कहा कि परिजन महिला का गर्भपात करने के लिए जोर दे रहे थे, जो उन्होंने नहीं किया। इसके कारण यह आरोप लगा रहे हैं। महिला के पति ने बताया कि उनके यहां कुछ महीने पहले एक गुड़िया ने जन्म लिया था। आगे संतान शीघ्र नहीं हो, इसके लिए 20 जनवरी 2016 को डिलीवरी के बाद कॉपर टी लगवा ली थी। उसके बाद उसमें खराबी आ गई तो अस्पताल संचालक ने उसे बदल दिया।
अनीश ने बताया कि इसके बाद उसकी पत्नी ने जब यह शिकायत की कि उसकी कॉपर टी घूमती महसूस हो रही है तो वह उसे दिखाने इसी अस्पताल में ले आए। जांच करने पर डॉक्टर ने 25 अक्टूबर को उसकी पति को गर्भवती घोषित कर दिया। पति ने आरोप लगाया कि इसके बाद अस्पताल स्टाफ ने उसे अशोभनीय बातें भी कही, लेकिन अब उपचार के लिए आने पर डॉक्टर ने बिना सहमति लिए पत्नी का गर्भपात कर दिया। उसने पूरे मामले के लिए अस्पताल प्रबंधन को दोषी बताया।
उसके साथ उसकी बिरादरी के कई लोग भी अस्पताल पहुंच गए और हंगामे के हालात उत्पन्न होता देख डाक्टर ने पुलिस को सूचित किया। इसके बाद इलाका थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रजनीश के नेतृत्व में सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात की जानकारी ली।
उधर, प्राइवेट अस्पताल के संचालक डाक्टर ने बताया कि गर्भवती होने का पता चलने पर परिजन गर्भपात करवाने के लिए कहने लगे तो अस्पताल से सिविल अस्पताल जाने को कहा गया था। अस्पताल ने यहां तक प्रस्ताव दिया था कि यदि कॉपर टी के बावजूद महिला गर्भवती हो चुकी है तो उसके मेडिकल और डिलीवरी का बिल अस्पताल वहन कर लेगा। उसके बाद 25 को वे सकुशल अस्पताल से चले गए थे, उसके बाद क्या हुआ यह वही बता सकते हैं। थाना प्रभारी का कहना है कि अभी दोनों पक्षों में बातचीत चल रही है।