बर्तनों में ही रह गया निवाला, फिल्म देखकर खाना खाने की थी तैयारी
-पेड़ ने बचाया आधी दीवार का हिस्सा, आधी ढहने से 5 की गई जान, तीन माह की बच्ची पीजीआई रेफर
-40 साल से अंबाला में ही रह रहे हैं प्रवासी परिवार, करीब 20 परिवार करते झुग्गी-झोपड़ियों में करते हैं निवास
एसडीएम के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे घटनास्थल पर, एंबुलेंस के देरी से पहुंचने के आरोप
उमेश भार्गव
अंबाला। गवर्नमेंट पीजी कालेज के पीछे हुए हादसे में 5 लोगों ने अपनी जान गवां दी जबकि 3 घायलों का देर रात साढ़े 11 बजे तक इलाज चल रहा था। इनमें से तीन माह की बच्ची को पीजीआई रेफर कर दिया गया। हादसे से पहले करीब 12 लोग खाना-खाने की तैयारी में थे। खाना बनकर तैयार हो गया था और बर्तनों में रही रखा था। जैसे ही दीवार गिरी तो बना बनाया सारा खाना भी गिर गया। साथ ही खाना-खाने से पहले दुनिया छोड़ गए। ये सभी परिवार करीब 40 साल से ही अंबाला में रह रहे थे। करीब 20 परिवार यहां पर रह रहे हैं।
---------------
पेड़ ने बचाई कई जान
इस दीवार के साथ ही एक पेड़ भी लगा हुआ है। इसी पेड़ की वजह से आधी दीवार नहीं ढही और पेड़ से आगे की आधी दीवार ढह गई। इसी दीवार के नीचे दबने से 5 जानें चली गई। यदि पेड़ नहीं होता तो पूरी दीवार गिरनी तय थी। अलबत्ता पेड़ ने कई जान बचा ली।
----------------
अवैध हैं झुग्गी-झोपड़ी
बेशक छावनी में बनी यह झुग्गी-झोपड़ियां अवैध हैं लेकिन यहां रहने वाले सभी परिवारों के राशन कार्ड अंबाला छावनी से ही बने हुए हैं। जिला प्रशासन ने इन्हें शिफ्ट भी कर दिया था। लेकिन फिर यहीं आकर बस गए।
----------------------
नाला खोदा गया लेकिन नहीं हो पाया निर्माण
बता दें कि मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य करीब 7 माह से चल रहा है लेकिन आज तक यहां न तो पार्किंग बन सकी न ही नाला। नाले का काम भी अधर में ही लटका है। इसी नाले के रिसाव के कारण दीवार में सीलन आने से उसमें दरारें आई।
----------------
एसडीएम के आने के बाद पहुंची एंबुलेंस
मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे की सूचना देने के करीब 25 मिनट बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची। एंबुलेंस उस समय मौके पर पहुंची जब एसडीएम सुभाष सिहाग ने मौके का मुआयना किया। इसके बाद रात करीब साढ़े 11 बजे निवर्तमान पार्षद और आजाद प्रत्याशी चित्रा सरवारा, कांग्रेस प्रत्याशी वेणू अग्रवाल, मंत्री अनिल विज मौके पर पहुंचे और मृतकों के परिजनों का ढांढस बंधाया।