चचेरे भाई से गर्भवती हुई नाबालिग को हर हाल में बच्चे को जन्म देना पड़ेगा। अब किसी भी हालत में उसका गर्भपात नहीं हो सकता। मेडिकल टर्मिनेशॅन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के नियमों के अनुसार उसका गर्भ निर्धारित समयावधि से ज्यादा हो सकता है। करीब सवा किलो का बच्चा है। बेहतर उपचार के लिए उसे चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित जनरल अस्पताल रेफर किया जा सकता है। फिलहाल शहर नागरिक अस्पताल में उसे शारीरिक टेस्ट कराए जा रहे हैं। शहर के महिला थाने में दर्ज पोस्को एक्ट के केस में नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर मंगलवार ऑब्जर्वर होम भेजा जा चुका है।
जानकारी के अनुसार पीड़िता का मामला पारिवारिक होने के कारणपरिवार भी गर्भपात के हक में था लेकिन एमटीपी एक्ट आड़े आ गया है। नियमानुसार केवल 24 माह तक की गर्भवती पर प्रक्रिया अमल में लाई जा सकती है। इसके बाद की गई एमटीपी न केवल नियमों का उल्लंघन माना जाता है बल्कि गर्भवती व बच्चे की जान के लिए भी खतरा हो सकती है। पीड़िता की शारीरिक स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
यह था मामला
-नौवीं पास नाबालिग के चाचा का लड़का करीब छह माह से उसके घर तब आता था जब परिजन नहीं होते थे। पहली बार जबरदस्ती करने के बाद उसे धमकी दी थी कि किसी को बताने पर वह उसे व परिवार को न केवल मार देगा बल्कि बदनाम भी कर देगा। पीड़िता ने मुंह बंद रखा। मामला सार्वजनिक होने से बचाने के लिए परिजन चुपचाप उसका गर्भपात कराने अस्पताल लाए थे लेकिन वहां पूछताछ में राज खुल गया।
पीड़िता का गर्भपात एमटीपी नियमों का उल्लंघन
गायनाकोलोजिस्ट डॉ. रजनी के अनुसार पीड़िता 27 सप्ताह की गर्भवती है। उसके पेट में करीब सवा किलो का बच्चा है। एमटीपी एक्ट के अनुसार केवल 24 सप्ताह के गर्भ का गर्भपात किया जा सकता है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ पीड़िता की जान को भी खतरा हो सकता है। महिला थाना को यह रिपोर्ट भेज दी गई है। यदि परिजन कोर्ट का रुख करते हैं तो भी मेडिकल बोर्ड में इन्हीं नियमों का हवाला दिया जाएगा। बेहतर इलाज के लिए पीड़िता को चंडीगढ़ सरकारी या पीजीआई में रेफर किया जा सकता है।
आरोपी को बाल सुधार गृह भेजा जा चुका
जांच अधिकारी एसआई देवेंद्र कौर के अनुसार गर्भवती नाबालिग के बयानों पर दर्ज पोस्को एक्ट के केस में नाबालिग को पकड़कर बाल सुधारगृह भेजा जा चुका है। सरकारी अस्पताल में भर्ती पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पर नजर रखी जा रही है। डाक्टरों से विचार-विमर्श जारी है। नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।