अंबाला छावनी के श्री सनातन धर्म मंदिर में कथा सुनते भक्तजन। संवाद
अंबाला। श्री सनातन धर्म सभा के 89 वें वार्षिक महोत्सव पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के छठे दिवस पर शिव-सती और शिव-उमा विवाह का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया। अमृतवर्षा करते हुए बाल योगिनी 1008 महामंडलेश्वर करुणागिरी महाराज दोनों कथाओं को सुनाकर भक्तों को निहाल कर दिया।
उन्होंने बताया कि विवाह उपरांत शिव जी और गिरिजा ने राजा हिमवान और मैना से आज्ञा लेकर बारतियो ंसहित कैलाश पर्वत पर प्रस्थान किया। ब्राह्मण स्त्रियों ने गिरिजा को पतिव्रत धर्म की शिक्षा देते हुए कहा, हे गिरिजे, अपने पति की सेवा लोक में अत्यंत आनंद प्रदान करने वाली है। पहला प्रियतम, दूसरा धर्म, तीसरी स्त्री तथा चौथा संतोष। लेकिन इन चारों की परीक्षा विपत्ति के समय में ही हो सकती है। स्त्रियां पतिव्रत धर्म से ही परमपद प्राप्त करती हैं। शिवजी गिरिजा से विवाह करके कैलाश पर्वत पर सुशोभित हुए।
कार्तिक महीने की छठी तिथि को शुभ लग्न व शुभ मुहूर्त में बालक कार्तिकेय का जन्म हुआ। शिवपुत्र सकंद ने तारकासुर का वध कर देवताओं को भययुक्त किया। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, जिनके वश में हैं, वे सबके गुरु अर्थात गणपति हैं। शिव जी द्वारा गिरिजा को गणेश चतुर्थ व्रत की महिमा बताना, गिरिजा द्वारा व्रत का रखा जाना और श्री गणेश की पुत्र रूप में प्राप्ति। कर्दम ऋषि की पत्नी ने भी इसी व्रत को करके भगवान कपिल को प्राप्त किया था। जब गुणवान पुत्र उत्पन्न होता है, तभी लोक में शुभ कर्मों का फल प्राप्त हुआ प्रतीत होता है। श्री सनातन धर्म सभा की ओर से प्रधान प्रो. तारा चंद गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विन्दलस, कोषाध्यक्ष अशोक सिंगला के साथ प्रधानाचार्या सुनीता मनचंदा तथा मंदिर पुजारियों आदि ने महाराज को पुष्प हार भेंट कर अभिनंदन किया।
अंबाला छावनी के श्री सनातन धर्म मंदिर में कथा सुनते भक्तजन। संवाद