- जेल गए व्यक्ति को अदालत ने सभी आरोपों से किया बरी
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। एक झूठी साजिश ने कानून के रखवालों को भी चौंका दिया। मामला दूध के बकाया रुपयों का विवाद और हमले से जुड़ा था जबकि पॉक्सो एक्ट जैसे संगीन जुर्म में एक व्यक्ति को जेल भेजा गया था। अदालत में पहुंचते ही मामले की सच्चाई सामने आ गई। दूध के पैसे न चुकाने पड़ें और पिटाई के मामले से बचने के लिए यह झूठी साजिश रची गई थी।
मामले की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) में सुनवाई हुई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप मित्तल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी रामतेज को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
साहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 11 दिसंबर 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 12 वर्षीय बेटी शाम को राज कुमार की डेयरी से दूध लेने गई थी। आरोप था कि वहां काम करने वाले उत्तर प्रदेश (बहराइच) निवासी रामतेज ने बच्ची के साथ छेड़खानी की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पॉक्सो एक्ट की धारा 8 व 12 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत के सामने तथ्य रखे कि बच्ची के चाचा पर डेयरी का पिछला बकाया था।
जब रामतेज ने दूध देने से इन्कार किया, तो बच्ची के चाचा ने तैश में आकर रामतेज के सिर पर प्लास से हमला कर दिया था। इस मामले से बचने और दूध के पैसे न चुकाने के लिए बच्ची के पिता के जरिए झूठी प्राथमिकी दर्ज करा दी। अदालत में डेयरी मालिक राज कुमार और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने गवाही दी कि घटना वाले दिन ऐसी कोई छेड़खानी नहीं हुई थी।
सिखाए गए बयानों के आधार पर सजा संभव नहीं : कोर्ट
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता ने अपनी जिरह में स्वीकार किया कि उसने पुलिस और अदालत के सामने अपने पिता और चाचा के कहने पर बयान दिए थे। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पीड़िता के बयान सिखाए-पढ़ाये प्रतीत होते हैं। मौके पर मौजूद स्वतंत्र गवाहों ने घटना से साफ इन्कार किया है। अभियोजन पक्ष का मामला विरोधाभासों से भरा है और आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला।