श्याम मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लगी भीड़। संवाद
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समालखा। अक्षय तृतीया पर रविवार को चुलकाना धाम स्थित श्याम बाबा मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। राज्य व देश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चुलकाना धाम की पहचान विश्व स्तर पर शक्तिपीठों में स्थापित हो चुकी है। दिन-प्रतिदिन भक्तों की संख्या और आस्था बढ़ रही है। देश के कोने-कोने से भक्तों का आना-जाना लगा रहता है प्राचीन काल में धर्मदास नामक वैश्य ने अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान कर देवी-देवताओं की पूजा की, साथ ही स्वर्ण, वस्त्र और दिव्य वस्तुएं ब्राह्मणों को दान दीं। रोगग्रस्त और वृद्धावस्था में भी उपवास कर दान-पुण्य किया, जिसके फलस्वरूप अगले जन्म में कुशावती के धनी राजा बने।
मान्यता है कि यह राजा आगे चंद्रगुप्त के रूप में जन्मा। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया। दक्षिण भारत में परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन परशुराम की पूजा और अर्घ्य का विशेष महत्व है। सौभाग्यवती स्त्रियां गौरी-पूजा कर मिठाई, फल, चने बांटती हैं व कलश में जल व फल दान करती हैं। चुलकाना धाम के प्राचीन श्याम बाबा मंदिर में महाभारत काल से जुड़ी शीशदान भूमि पर बाबा श्याम की पूजा होती है। यह स्थान भक्तों की अपार आस्था का केंद्र है।