अंबाला। छावनी में इंदिरा पार्क के साथ सटी सरकार की बेशकीमती लीज लैंड सर्वे नंबर 164-सी राबर्ट पवेलियन ग्राउंड को हथियाने के लिए फर्जी लीज लैंड सर्टिफिकेट तैयार करवाने के मामले की कार्रवाई का निर्देश उपायुक्त ने डीसीपी को दिए हैं। पुलिस उपायुक्त पूरे मामले का अवलोकन कर कार्रवाई करेंगे। उपायुक्त ने पहले फर्जीवाड़े की जांच जिला राजस्व अधिकारी को दी थी। डीआरओ की जांच रिपोर्ट के बाद डीसी ने डीसीपी को उचित कार्रवाई के लिए लिखा है।
‘अमर उजाला’ ने उठाया था मामला
लीज लैंड सर्वे नंबर 164-सी पर कब्जे को लेकर चल रहे फर्जीवाड़े में एक निजी ट्रस्ट इस जमीन का लीज लैंड सर्टिफिकेट नायब तहसील कार्यालय अंबाला छावनी से तैयार करवाया। यह सर्टिफिकेट जाली है। इसका खुलासा 20 अक्तूबर 2012 के अंक में ‘अमर उजाला’ ने ‘बिना रिकार्ड तैयार हुआ फर्जी सर्टिफिकेट’ शीर्षक समाचार में किया था। जिला उपायुक्त ने इस मामले की जांच जिला राजस्व अधिकारी को सौंप दी। जिला राजस्व अधिकारी ने इस मामले में जांच पूरी कर अब मार्च 2013 में रिपोर्ट डीसी अंबाला को सौंप दी है। जिसमें जिला राजस्व अधिकारी ने भी इस लैंड सर्टिफिकेट को फर्जी करार दे दिया है।
यह है मामला
एक निजी ट्रस्ट के कुछ लोगों ने इस जमीन का एक लैंड सर्टिफिकेट नायब तहसील कार्यालय अंबाला छावनी (सब-रजिस्ट्रार, अंबाला कैंट) से तैयार करवाया। इस फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल इस निजी ट्रस्ट ने छावनी के ही एक निजी स्कूल की मान्यता लेने के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग और सीबीएसई के कार्यालयों में किया। साथ ही इस लैंड सर्टिफिकेट में यह भी लिखवा लिया गया कि, ‘यह प्रमाणित किया जाता है कि इस पर हक एक निजी ट्रस्ट का है और निजी ट्रस्ट ने ये जमीन एक दूसरी गठित किए गए निजी ट्रस्ट सोसायटी को दान कर दी है।’ सर्टिफिकेट पर यह भी लिखवा दिया गया कि इस लीज लैंड 164-सी पर अब एक निजी स्कूल स्थित है। जबकि असलियत यह है कि ये जमीन अंग्रेजों के जमाने में फुटबाल खेलने के लिए राबर्ट पवेलियन के रूप में दी गई थी और यह घोषणा की गई थी कि इस जमीन की नेचर इसी तरह रहेगी। ऐसी लीज लैंड को किसी को दान में कैसे दिया जा सकता है?
दूसरी हैरतअंगेज बात यह कि इस लीज लैंड का जो लैंड सर्टिफिकेट नायब तहसीलदार कार्यालय छावनी से तैयार किया गया, उस कार्यालय में इस जमीन से संबंधित रिकार्ड ही नहीं है। संबंधित कार्यालयों के अफसर खुद ये बात स्वीकार कर चुके हैं। जब रिकार्ड ही नहीं है, तो ऐसा लैंड सर्टिफिकेट तैयार कैसे हो गया? जिस पर न तो कार्यालय का क्रमांक नंबर है और न ही दिनांक।
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अब रहेगा डीसीपी की कार्रवाई का इंतजार
डीसी अंबाला की ओर से इस फर्जीवाड़े पर उचित कार्रवाई के लिए डीसीपी अंबाला को लिखा है। अब डीसीपी अंबाला को इस फर्जीवाड़े में कार्रवाई करनी है। लेकिन इससे पहले डीसीपी इस फर्जीवाड़े और उस पर जिला राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट का अवलोकन करेंगें। जबकि अपराध विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी जमीन पर अपना कब्जा दिखाने का यह एक संगीन और गंभीर मामला है।