अंबाला। केंद्र सरकार द्वारा अनुदान वाले रसोई गैस सिलेंडर पर कसी लगाम ने घरों में रसोई का तानाबाना बिगाड़ दिया है। अब यदि व्यक्ति को एक ही घर में दो गैस कनेक्शन चाहिए तो उन्हें अपने घरों की रसोई को अलग करनी होगी। इसी को लेकर लोग इन दिनों बहुत ज्यादा परेशान और नाराज है। जो लोग किसी के घरों में किराए पर रह रहे हैं, उनके लिए भी इन दिनों खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रह है। जबकि घरों में रहने वाले संयुक्त परिवार को तो बहुत ही ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि पहले रसोई गैस सिलेंडर अनुदान के साथ ही मिलते थे। जिनकी कीमत 406 रुपये प्रति सिलेंडर था। लेकिन अब सरकार ने यह घोषणा कर दी है कि पूरे साल में अनुदान वाले केवल 9 सिलेंडर ही एक परिवार को दिए जाएंगे। इसके बाद सिलेंडर चाहिए तो 903 रुपये प्रति सिलेंडर अदा करना पड़ेगा।
इसी झंझट से निबटने के लिए अब संयुक्त परिवार में एक साथ रहने वाले अलग-अलग परिवार चाहते हैं कि वह अपने नाम से भी रसोई गैस कनेक्शन ले लें। लेकिन ऐसा करने के लिए इन परिवारों को अपनी रसोइयां भी अलग करके उसे दर्शानी होगी।
यानी यदि एक ही परिवार में तीन भाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक ही घर में मिलकर रहते हैं और सभी का खाना एक ही किचन में बनता है, तो नया कनेक्शन लेने पर उन्हें एक रसोई वाला अपना ‘प्यार’ को दांव पर लगाना होगा। क्योंकि एक ही परिवार में रहने वाले सभी भाइयों के परिवार को अपनी अलग-अलग रसोई बनानी होगी।
बाकायदा इस बारे में एफिडेविट देना होगा कि वह एक ही मकान में तो रहते हैं, लेकिन उनका परिवार और रसोइयां दोनों अलग-अलग है। केवल शपथ पत्र से ही नहीं, बल्कि रसोई गैस एजेंसी का कारिंदा खुद घर पर आएगा और वह उस परिवार में रहने वाले लोगों के परिवार की अलग-अलग रसोइयां भी देखेगा और फिर अपनी रिपोर्ट देगा। उसकी रिपोर्ट के बाद ही एक ही पते पर दूसरा कनैक्शन जारी किया जाएगा।
गैस उपभोक्ता मक्खन सिंह, रौशन, बिशंबर प्रसाद और बिमला देवी के अनुसार उनके परिवारों में उनके बच्चे एक ही छत के नीचे रहते हैं और एक ही रसोई में मिलकर खाना बनाते हैं और मिलकर खाते हैं। लेकिन अब साल में अनुदान वाले 9 सिलेंडरों से काम चलने वाला तो हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि एक अन्य परिवार का सदस्य नया कनेक्शन ले लें। लेकिन इसके लिए अब संयुक्त परिवार की रसोई तोड़कर नई रसोई तैयार करनी होगी, रसोई की इंस्पेक्शन होगा, तब जाकर नया कनेक्शन मिलेगा। उनके अनुसार बताइए इस व्यवस्था से अब संयुक्त परिवारों की रसोइयां तोड़ने तक की नौबत आ गई है, सरकार सिलेंडरों की व्यवस्था पहले जैसी क्यों नहीं करती?