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बिजली संकट: हजारों परिवारों को अभी राहत नहीं!

Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
Ambala
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अंबाला। शहर और छावनी में नगर परिषदों को खत्म कर नगर निगम के गठन के बाद ट्विनसिटी में लगभग सत्ताइस गांवों की 210 कालोनियां तीन साल पहले ही नगर निगम सीमा में आ गई थी। लेकिन हैरत की बात यह है कि इन शहरी क्षेत्र में आने के बावजूद अधिकतर कालोनियाें की बिजली सप्लाई आज भी ग्रामीण फीडरों पर ही निर्भर है।
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ग्रामीण फीडरों पर बिजलीकट शहरी फीडरों की अपेक्षकृत बहुत ज्यादा लगते की वजह से इन कालोनियाें के हजारों परिवारों को बहुत ज्यादा परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इसके लिए छावनी के विधायक अनिल विज समेत कालोनी के बाशिंदे इसे शहरी फिडर से जोड़ने की मांग को बहुत बार उठा चुके हैं। लेकिन आज तक इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई है।
सबसे ज्यादा परेशानियां रामपुर, सरसेहड़ी, सुदंरनगर, शाहपुर, करधान, खुड्डा कलां, खुड्डा खुर्द इत्यादि ग्रामीण इलाकों की निगम में शामिल हुई कालोनियों के हजारों परिवारों को आ रही है। यहां स्थानीय लोगों की मांग है कि जब कालोनियां नगर निगम के शहरी इलाके में आ गई है तो बिजली की सप्लाई भी शहरी फीडर पर दिए जाएं।
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ठंडे बस्ते में प्रस्ताव
कालोनियों की बिजली सप्लाई शहरी फीडर (अर्बन मोड) पर करने को लेकर लोगों की मांग के चलते अंबाला के बिजली निगम ने आला अधिकारियों ने एक्सईएन स्तर के अफसरों को इस बारे में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इसके बाद बाकायदा इस बारे में प्रस्ताव तैयार किया गया। मगर जब इसका बजट एस्टीमेट तैयार किया गया, तो बिजली निगम के अफसरों की चिंता बढ़ गई। सूत्रों के अनुसार ये बजट करोड़ों में है, जिसका खुलासा फिलहाल बिजली निगम अफसर नहीं कर रहे हैं। इसके लिए कई शहरी फीडर और तैयार करने पड़ेंगे, क्योंकि पहले ही शहरी क्षेत्र के फीडर ओवरलोड हो चुके हैं और अब ज्यादा बोझ झेलने की क्षमता उनमें नहीं है। बिजली निगम सूत्रों के अनुसार बिजली निगम के अफसरों ने इन इलाकों से अपने नफे-नुकसान का भी आकलन कर लिया है। निगम अफसरों का मानना है कि ग्रामीण फीडरों पर सप्लाई लेने वाले लोग टांका लगाकर चोरी ज्यादा करते हैं, इसलिए यदि इन कालोनियाें की सप्लाई शहरी फीडर पर ली जाएगी, तो महकमे को बिजली चोरी और बिलों की अदायगी में अड़चन के रूप में नुकसान हो सकता है। सूत्रों के अनुसार अब इसी तमाम मंथन के बाद बिजली निगम के अफसरों ने फिलहाल ये प्रोजेक्ट ही ठंडे बस्ते में डाल दिया है और आने वाले समय में ऐसी संभावना कम ही दिख रही है।

बिजली निगम जनहित में काम करे
स्थानीय निवासी पुरूषोत्तम शर्मा, सुरेश पाल, अशोक शर्मा व सतिंद्र कुमार कहते हैं कि ग्रामीण फीडर की सप्लाई की वजह से लोगों को यहां बहुत ज्यादा कट झेलनी पड़ते हैं। शहरों की अपेक्षाकृत ग्रामीण फीडर पर दस से चौदह घंटों का कट लग जाता है। गर्मियों में तो यहां कालोनीवासियों की हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है। इसलिए जब कालोनियां शहर में आ गई हैं, तो सप्लाई भी शहरी फीडर से दी जानी चाहिए। सांझा मोर्चा के संयोजक कमल किशोर जैन, सुरेश गर्ग, गगन डांग के अनुसार अफसरगण पहले ही ये मान रहे हैं कि कालोनियाें को यदि शहरी फीडर पर लिया जाएगा तो नुकसान होगा। लेकिन अफसरों को चाहिए कि चोरी की घटनाओं को सख्ती से रोकें और जनहित में काम करते हुए इन कालोनियों को अर्बन मोड पर लिया जाए।

‘निगम में जुड़ी नई कालोनियों को अर्बन मोड में लिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया है। लेकिन इसमें बहुत ज्यादा बजट की जरूरत है। प्रस्ताव आला अफसरों के पास भेजा हुआ है। उनके निर्देशानुसार और स्वीकृति के बाद ही ही आगे कार्रवाई की जाएगी।
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- बीएस रंगा, एक्सईएन, बिजली निगम
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