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प्रकाशोत्सव को लेकर असमंजस में संगत, कई गुरुद्वारों में शनिवार को मनाया उत्सव
नानकशाही कैलेंडर के अनुसार 13 जनवरी को मनाया जाएगा गुरु पर्व
धर्म प्रचारकों ने श्रद्धालुओं को गुरु के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी और सिमरन करने का किया आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। दसवीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाशोत्सव की तारीख को लेकर शनिवार को असमंजस की स्थिति रही। अंबाला की केंद्रीय गुरुद्वारा गुरुपर्व कमेटी से जुड़े कई गुरुद्वारों में शनिवार को ही प्रकाशोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। वहीं कई अन्य गुरुद्वारों में एसजीपीसी द्वारा जारी होने वाले नानकशाही कैलेंडर के मुताबिक शनिवार को प्रकाशोत्सव नहीं मनाया गया और यह आगामी 13 जनवरी को मनाया जाएगा। प्रकाशोत्सव को लेकर असमंजस की स्थिति होने के कारण कई गुरुद्वारों में संगत की मौजूदगी कम रही।
शनिवार को गुरुद्वारा गोबिंद नगर, दयालबाग, महेश नगर, कछतरी सत्संग एवं अन्य गुरुद्वारों में तीन दिन से चल रहे श्री अखंड पाठ साहिब के प्रात: भोग डाले गए। इसके उपरांत रागी जत्थों ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। धर्म प्रचारकों ने श्रद्धालुओं को गुरु के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी और आह्वान किया कि सदैव सिमरन करें। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से गुरु गोबिंद सिंह ने विक्षम परिस्थितियों में कौम की रक्षा के लिए अपने संपूर्ण परिवार का बलिदान तक दे दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए अटूट लंगर भी लगाए गए। गोबिंद नगर गुरुद्वारे में धूमधाम से गुरुपर्व मनाया गया। मौके पर गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सुदर्शन सिंह सहगल ने सभी को प्रकाशोत्सव की बधाई दी।
वहीं, गुरुद्वारा कछतरी सत्संग में प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया जिसमें हजूरी रागी भाई सतनाम सिंह, स्त्री सत्संग सभा गुरुद्वारा कछतरी सत्संग एवं मनजौ कौर एवं गुरशीन कौर और अंत में भाई गुरसेवक सिंह पटियाला वालों ने संगत को कीर्तन द्वारा निहाल किया। तत्पश्चात गुरु के लंग्गर वितरित किए गए। इस अवसर पर प्रधान कुलदीप सिंह ढिल्लों, हरचरण सिंह, परमजीत सिंह ओबराय, जेपीएस ओबराय, तेजिंद्र सिंह, मनमोहन सिंह, मंजीत सिंह, जसवंत अजमानी मौजूद रहे।
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कैंट में प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में नगर कीर्तन 11 को : पाली
उधर, एसजीपीसी सदस्य हरपाल सिंह पाली ने बताया कि एसजीपीसी अमृतसर द्वारा जारी नानकशाही कैलेंडर के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाशोत्सव 13 जनवरी को है। उन्होंने बताया कि पूर्व में एसजीपीसी द्वारा वर्ष 2003 में नानकशाही कैलेंडर जारी किया था जिसमें पांच जनवरी को प्रकाशोत्सव का दिन तय किया गया था, मगर अब संशोधित नानकशाही कैलेंडर जारी हुआ है जिसके अनुसार 13 जनवरी को प्रकाशोत्सव होगा। अधिकतर गुरुद्वारों में 13 जनवरी को प्रकाशोत्सव मनाया जाएगा। अंबाला में 11 जनवरी को कैंट में प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य पर नगर कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा। जिन गुरुद्वारों में शनिवार को प्रकाशोत्सव मनाया गया वह पूर्व में जारी कैलेंडर के अनुसार किया गया है।