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20 केस एडीसी कोर्ट में, मिठाइयां ऐसी बाजार में बिकने लायक नहीं

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कुलदीप चहल
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अंबाला कैंट। जिले में मिलावटखोरी का धंधा जमकर चल रहा है, जबकि आंकड़े बताते हैं कि इस साल मिलावट का खेल उपभोक्ताओं की सेहत बिगाड़ सकता है। फूड एंड सेफ्टी विभाग ने जिस तरह से इस साल सैंपलिंग की, उसमें यह साफ हो गया कि खाद्य पदार्थों के सेवन में उपभोक्ताओं को सावधानी बरतनी पड़ेगी। जो सैंपल निगेटिव आए हैं, उनमें से कुछ तो ऐसे हैं, जो बिक्री के लायक भी नहीं थे।
फूड एंड सेफ्टी विभाग ने जनवरी से नवंबर 2018 तक जिले भर से खाद्य पदार्थों के 158 सैंपल लिए हैं। इनमें से 153 सैंपल की रिपोर्ट विभाग को मिल चुकी है। विभाग को जो रिपोर्ट मिली है, उसके तहत 20 सैंपल ऐसे हैं, जो स्तरहीन थे या फिर बिक्री के लायक ही नहीं थे। लेकिन नियमों का फेर ऐसा रहा कि जो खाद्य पदार्थ बिक्री के लायक नहीं थे, वे भी मार्केट में बेच दिए गए। इनमें से 20 केस तो एडीसी कोर्ट में दायर किए जा चुके हैं, जबकि 5 सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है। फूड एंड सेफ्टी विभाग का कहना है कि इन मामलों में लाखों रुपये जुर्माने से लेकर जुर्माना व कैद दोनों हो सकते हैं।
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बिक्री लायक नहीं, वे भी बेचे गए
विभाग को जो रिपोर्ट मिली है, उनमें से चार सैंपल निगेटिव आए हैं। यानी यह खाद्य पदार्थ ऐसे थे, जो लोगों के खाने लायक नहीं थे और इनमें मिलावट पाई गई है। यह सैंपल खोये के हैं, जिनसे बनी मिठाईयां बाजार में बेचने लायक नहीं थीं। इतना ही नहीं पनीर, देसी घी तक के सैंपल में मिलावट पाई गई और विक्रेताओं ने जमकर चांदी कूटी है। आंकड़ों पर नजर डाले तो यह साफ है कि मिठाइयों में सबसे ज्यादा गोलमाल किया गया है और मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया गया है।
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जनवरी से नवंबर तक विभाग द्वारा की गई सैपलिंग की रिपोर्ट मिल चुकी है, जिनमें से 20 सैंपल फेल पाए गए हैं। इन में से 9 केस एडीसी कोर्ट में हैं, जबकि 11 अन्य के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। अब सीजन में ही नहीं नियमित रूप से भी यह अभियान चलाया जाएगा।
- सुभाष चंद्र, इंस्पेक्टर फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट, अंबाला
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