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खेलों की ट्रेनिंग मिलती नहीं, तो कैसे खेलेंगे माडर्न गेम्स

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अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला कैंट। नेशनल स्कूल गेम्स में दर्जनों खेलों को तो शामिल किया गया है लेकिन ग्रामीण स्तर पर कई गेम्स ऐसे हैं जिनके प्रशिक्षण की व्यवस्था तक ग्रामीण हलकों में नहीं है। खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों में तो इनकी व्यवस्था है ही नहीं, जबकि ब्लाक स्तरीय स्टेडियम में भी इनका टोटा है। ऐसे में यदि ट्रेनिंग लेनी है तो उसके लिए कई किलोमीटर की दौड़ लगाकर सिटी या कैंट तक आना पड़ता है। यही कारण है कि कई गेम्स में जिला स्तर पर इन खेलों के खिलाड़ी ही सामने नहीं आ पाते। इस बारे में एईओ स्पोर्ट्स शिक्षा विभाग अंबाला राजेंद्र सिंह का कहना है कि अधिकतर गेम्स की ट्रेनिंग तो स्कूल लेवल पर दी जाती है। यदि कोई बच्चा किसी खास खेल में भाग लेना चाहता है, तो उसकी व्यवस्था की जा सकती है।
स्टेडियम का बुरा हाल, कोच तक नहीं
स्कूल स्तर पर खेलों की ट्रेनिंग का जिम्मा डीपीआई और पीटीआई संभालते हैं, जबकि अन्य स्तर पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जहां पर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग मिल सके। खास है कि ब्लाक स्तर पर दिए गए खेल स्टेडियम का बुरा हाल है जबकि इनमें कोच तक नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में डीसी अंबाला ने मीटिंग लेकर ब्लाक लेवल स्टेडियम की रिपोर्ट मांगी है, जबकि इनमें व्यवस्थाएं देने के भी निर्देश दिए हैं।
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स्कूल स्तर पर भी साधन सीमित
जिले के राजकीय स्कूलों में खेलों को लेकर संसाधन काफी कम हैं। अधिकतर स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपना मैदान तक नहीं है। स्कूल नेशनल लेवल पर करीब चालीस गेम्स विभिन्न आयु वर्गों में खेले जाते हैं, लेकिन इनमें से कई गेम्स के खिलाड़ी जिलास्तर पर काफी कम हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तो हैं ही नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में फेंसिंग, साइकलिंग, लॉन टेनिस, जिमनास्टिक, स्वीमिंग एंड डाइविंग, शूटिंग, टेबल टैनिस, स्केटिंग, रोलर हॉकी आदि ऐसे खेल हैं जिनके खिलाड़ी ही नहीं हैं। यदि कोई है तो इक्का-दुक्का ही मिलते हैं। इनकी ट्रेनिंग के लिए खिलाड़ियों को कई किलोमीटर दूर आना पड़ता है।
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