अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
आशा वर्कर यूनियन अंबाला ने अपनी मांगों को लेकर वीरवार को सिविल सर्जन कार्यालय अंबाला सिटी पर धरना दिया। धरने की अध्यक्षता यूनियन की प्रधान अंजू वर्मा ने की। धरने में सीटू व सर्व कर्मचारी संघ के नेता भी मौजूद रहे।
सीटू के जिला सचिव रमेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में हरियाणा व केंद्र की भाजपा सरकार ठेकेदारों की तरह मजदूरों और कर्मचारियों से कम वेतन में काम करवा रही हैं, जिसका जीता-जागता उदाहरण आशा वर्कर ही हैं। रमेश ने कहा कि सरकार आशा वर्कर से मात्र एक हजार रुपये प्रति माह में दिन-रात काम लेती है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग भी उनके ऊपर अपना काम करने के लिए दबाव बनाता है। लेकिन न्यूनतम वेतन लागू नहीं करते। जबकि समान काम के लिए समान वेतन मिलना अति आवश्यक है। सरकार बंधुआ बनाकर गरीबों, मजदूर महिलाओं का शोषण कर रही है। ऐसे हालातों को बदलने के लिए संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार बड़े पूंजीपतियों को टैक्स में छूट देती है तथा आशा वर्कर्स की मेहनत लूट कर अपनी तिजोरियां भर रही है।
प्रधान अंजू ने कहा कि सरकार आशा वर्कर को सरकारी कर्मचारियों का दर्जा दे साथ ही उनका वेतन भी बढ़ाए। न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये से लागू किया जाए। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा लागू की जाए, 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए, एनएचएम मिशन को स्थाई बनाया जाए, सभी आशाओं को अलमारी, कुर्सी, हाजिरी रजिस्टर दिया जाए। इस मौके पर प्रेम लता, सुनीता, मीना, सर्वजीत, परमीला, अनीता, रजवंत, सुमन, कुलदीप कौर, बलजिंद्र कौर, पुष्पा, पुण्यलता आदि मौजूद रही।