कल थम सकते हैं अंबाला डिपो की 210 बसों के पहिए
अंबाला कैंट।
रोडवेज यूनियन ने कल चक्का जाम का ऐलान कर दिया है। यानी वीरवार को यदि आप बस से कहीं सफर करने की सोच रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा न हो बस अड्डों पर बसें आपको मिले ही नहीं। रोडवेज यूनियन ने 28 दिसंबर को चक्का जाम का ऐलान किया है। मांगों को लेकर अंबाला के अलावा प्रदेश भर में यूनियन सदस्य कामकाज ठप कर बैठेंगे। चक्का जाम का असर सबसे ज्यादा अंबाला-चंडीगढ़ और अंबाला-दिल्ली और अंबाला-पटियाला रूट पर पड़ेगा जहां प्रतिदिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। हरियाणा रोडवेज की पांच यूनियन ने साफ कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह 28 दिसंबर को चक्का जाम करेगी। हड़ताल के दौरान अंबाला डिपो व सब डिपो नारायणगढ़ की 210 बसों में से एक बस भी नहीं चलेगी। वहीं सिर्फ अंबाला डिपो को एक दिन में ही 20 से 25 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है। दूसरी ओर रोडवेज अधिकारी इस हड़ताल को टालने की हर कोशिश कर रहे हैं और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
55 हजार किलोमीटर चलती है प्रतिदिन बसें
हरियाणा रोडवेज से अंबाला डिपो की 210 बसे विभिन्न रूटों पर तकरीबन 55 हजार किलो मीटर प्रतिदिन चलती है। इसमें से मुख्य रूप से अंबाला-चंडीगढ़, दिल्ली, पटियाला, हिमाचल के शिमला, धर्मशाला, मंडी, उत्तराखंड, यूपी, अमृतसर और अन्य राज्यों में बसे चलाई जाती है। हड़ताल की वजह से इन रूटों पर असर पड़ सकता है। सबसे ज्यादा असर अंबाला-चंडीगढ़ रूट पर पड़ेगा जहां प्रतिदिन हजारों दैनिक यात्री आते-जाते हैं।
यह हैं यूनियन की प्रमुख मांगे
- विभाग की ओर से मानी गई मांगों को जल्द से जल्द लागू किया जाए।
- आए दिन आने वाले तुगलकी फरमानों को बंद किया जाए।
- बी और सी कर्मचारियों की पदोन्नति को अंत समय में केवल संपत्ति ब्यौरा देने के लिए रोक दी दिया गया जो कि गलत है।
- रोडवेज में जल्द से जल्द नई बसें दी जाएं
- 2016 में लगे चालकों को तुरंत पक्का किया जाएं
- चालक-परिचालक और कार्यशाला में तुरंत पक्की भर्ती की जाए
- तीन साल का बकाया बोनस जल्द दिया जाए
- खाली पदों पर भर्ती की जाए साथ ही अन्य मांगों के बारे में बताया।
हड़ताल से पूर्व राज्य परिवहन मंत्री ने बुलाई बैठक
हड़ताल से पूर्व राज्य परिवहन मंत्री ने सभी कर्मचारी यूनियनों की बैठक बुलाई है जिसमें कर्मचारियों द्वारा की जा रही मांगों पर विचार विमर्श किया जाएगा। सरकार उनके उचित मांगों को मान भी सकती है, लेकिन अगर अगर सरकार कर्मचारियों की मांगे नहीं मानती है तो कर्मचारी चक्का जाम पर डटे रहेंगे।
तो साल में होगी तीसरी हड़ताल
यदि बुधवार को रोडवेज यूनियन की सरकार से वार्ता सिरे नहीं चढ़ती है तो वीरवार को हड़ताल तय है। ऐसे में इस वर्ष में रोडवेज यूनियन की यह तीसरी प्रदेश स्तरीय हड़ताल होगी। इससे पहले विभिन्न मुद्दों को लेकर हड़ताल 10 से 13 अप्रैल तक हुई थी। फिर 13 जून को नई परिवहन नीति के विरोध में हड़ताल हुई।
रोडवेज वर्कशाप में हुई यूनियन सदस्यों ने मीटिंग बनाई रणनीति
हरियाणा रोडवेज यूनियन की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर कर्मचारियों की मीटिंग बुलाई गई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पांचों यूनियनों के ज्वाइंट प्रधान विक्रम राणा ने सरकार के खिलाफ वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए चक्का जाम में भाग लेने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर को कर्मचारियों द्वारा सरकार को नोटिस देकर चक्का जाम के बारे में बता दिया गया था मगर अभी तक सरकार ने किसी भी तरह की कोई वार्तालाप नहीं की है। साथ ही चक्का जाम की रणनीति भी बनाई। इस मौके पर राज्य कमेटी के वरिष्ठ सदस्य बलवान सिंह, सर्वजीत सिंह, राम प्रकाश, विजय कुमार, पवन, दलजीत सिंह राणा, माया राम, सत्येद्र, अजायब सिंह, रणधीर सिंह, वसंत सैनी व अन्य ने भी संबोधित कर चक्का जाम में भाग लेने के लिए कहा।
रेलवे और प्राईवेट बसों पर पड़ेगा अधिक भार
चक्का जाम होने से रेलवे व प्राइवेट बसों पर अधिक भार पड़ सकता है। वैसे भी धुंध के कारण कई रेल गाड़ियां लेट चल रही हैं और रद्द हो रही हैं। रेल से ज्यादा बस सेवा पर ज्यादा यात्री निर्भर हैं। चक्का जाम होने की सूरत में यात्रियों पर खासा असर पड़ेगा। वहीं सरकारी बसें न चलने पर प्राईवेट बसों में भी अधिक भार पड़ेगा। लेकिन यूनियन सदस्यों का कहना है कि कुछ प्राइवेट बसों की यूनियन भी कर्मचारियों का सहयोग कर रही हैं जिस कारण प्राइवेट बस चालक भी बसे नहीं चलाएंगे।