19.96 लाख की लागत से कैंटोनमेंट बोर्ड भगाएगा मच्छर
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तालाब एवं पार्कों में लगाई जाएंगी आठ मॉसकीटों कीलिंग मशीनें
पहले तीन माह तक लिया गया था ट्रायल, नतीजे सफल होने पर मशीनें लगाने का लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में मच्छरों का कम प्रभाव हो, इसके लिए बोर्ड अब लाखों रुपये खर्च करेगा। बोर्ड द्वारा 19.96 लाख रुपये की लागत से विभिन्न क्षेत्रों में आठ मॉसकीटों कीलिंग मशीन लगाई जाएंगी। मशीनें सुबह व शाम के समय प्रभावी होंगी जब मच्छरों की भरमार ज्यादा होती है। यह मशीन वैज्ञानिक तरीके से अपनी ओर मच्छरों को आकर्षित कर उन्हें मारेगी। बोर्ड ने तीन माह पूर्व ट्रायल तौर पर एक मशीन सीबीए लेक में लगाई थी। इसके परिणाम सकारात्मक रहे जिस वजह से अब अन्य क्षेत्रों में इस मशीन को लगाने का निर्णय लिया है। बोर्ड के सीईओ वरुण कालिया ने कहा कि बोर्ड क्षेत्र में लोगों को बेहतर माहौल मिल सके, इस वजह से लाखों मूल्य में यह मशीनें लगाई जा रही हैं।
इस तरह काम करती है मशीन
मॉसकीटों कीलिंग मशीन कार्बन डाई ऑक्साइड सिलिंडर युक्त होती है। खुले स्थान पर इसे स्थापित किया जाता है। इसे ऑन करने पर यह बड़ी मात्रा में गर्म गैस को छोड़ती हैं। मच्छर मनुष्य से निकलने वाली गर्मी की ओर आकर्षित होता है और मशीन भी ठीक इसी तरह से गर्मी छोड़ मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित करती है। नेट में मच्छर फंस जाते हैं और वहीं मशीन इलेक्ट्रिक शॉक के जरिये इन्हें मार देती है। शाम को मच्छरों की भरमार ज्यादा होती है उस समय यह मशीन कारगर साबित होती है। इससे न पर्यावरण को नुकसान है, न ही पर्यावरण अनुकूल जीव जंतुओं को।
डेंगू के मामले रोकने में कारगर साबित हो सकती है मशीन
कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा कैंट स्थित सीबीए लेक, तोपखाना के निकट बनाई गई नई लेक, विभिन्न पार्कों के अलावा तोपखाना के आबादी वाले क्षेत्र और लालकुर्ती क्षेत्र में लगाएगा। इससे बड़ी संख्या में मच्छरों को मारा जा सकेगा। बता दें कि अंबाला में डेंगू के बढ़ते मामलों में यह मशीन बेहद कारगर साबित हो सकती है। इससे मच्छरों पर नियंत्रण रखा जा सकता है। बोर्ड द्वारा जिस कंपनी को मशीनें लगाने का कांट्रेक्ट अलॉट किया है वह इन मशीनों की देखरेख भी करेगी।
कोट्स
कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र का माहौल बेहतर बना रहे, इसके लिए मशीनें लगाई जा रही हैं। पर्यावरण को इन मशीनों से कोई नुकसान नहीं है। आठ अलग-अलग स्थानों पर यह मशीनें लगाई जाएंगी।
-वरुण कालिया, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।