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135 में से केवल तीन बसें निकली रोडवेज डिपो के बाहर

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चक्का जाम : 135 में से मात्र तीन बसें निकलीं लोकल रूट पर डिपो के बाहर, दोपहर को वो भी लौटीं
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फोटो नंबर : 17 से 20
दिनभर रोडवेज डिपो में रही तनाव की स्थिति, यात्रियों को हुई परेशानी
प्राइवेट बसों को रोडवेज के बेड़े में शामिल करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। प्राइवेट बसों को रोडवेज के बेड़े में शामिल करने के फैसले के विरोध में रोडवेज यूनियनों द्वारा दो दिन के चक्का जाम के ऐलान का व्यापक असर दूसरे दिन भी दिखने को मिला। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार 135 में से मात्र 3 बसें ही डिपो से लोकल रूट के लिए निकाली गईं, वो भी दोपहर को वापस आ गईं। इससे यात्री परेशान रहे। उन्हें प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा जबकि अन्य राज्यों की बसों में सफर करना पड़ा। उधर, स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए डिपो में पुलिस बल तैनात रहा और रोडवेज जीएम गगनदीप, डीएसपी, ट्रैफिक मैनेजर व अन्य मौके पर रहे। बता दें कि रोडवेज कर्मचारी सरकार पर रोडवेज का निजीकरण का आरोप लगा रहे हैं और पहले दिन से ही 720 बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत लाने का विरोध कर रहे हैं। मंगलवार को आठ कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था एस्मा के तहत केस दर्ज किया गया था।
प्राइवेट वाहन चालकों की चांदी
हड़ताल के चलते यात्रियों को जहां अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रेनों का सहारा लेना पड़ा, प्राइवेट वाहन चालकों ने इसका जमकर फायदा उठाया और मुंह मांगे दाम वसूले। इस दौरान सवारियों को प्राइवेट बसों की छत पर जाम जोखिम में डालकर सफर करते भी देखा गया।
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कुछ कर्मियों ने की ड्यूटी
एक ओर रोडवेज के कर्मी हड़ताल पर थे तो रोडवेज के कुछ कर्मी बुधवार को भी अपनी ड्यूटी करने के लिए डिपो में वर्कशॉप में बैठे दिखे। इस दौरान वह रोडवेज कर्मी जीएम से यह कहते दिखे कि वह इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं और वह बुधवार को भी ड्यूटी देंगे।
कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह ने किया समर्थन
रोडवेज कर्मचारियों का समर्थन करने कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कर्मचारियों का शोषण करने पर लगी हुई है। उन्होंने कहा कि हर विभाग का कर्मचारी सरकार की नीतियों से परेशान है। सरकार को कर्मचारियों की मांगों की ओर ध्यान देने की जरूरत है।
दो दिन में 28 लाख से ज्यादा के राजस्व का नुकसान
रोडवेज के दो दिन के चक्का जाम से विभाग को लाखों का नुकसान हुआ है। अगर एक दिन की कमाई की बात करें तो केवल अंबाला डिपो को एक दिन में करीब 14 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है लेकिन मंगलवार व बुधवार की हड़ताल को देखते हुए विभाग को केवल अंबाला डिपो से करीब 28 लाख से ज्यादा का राजस्व नुकसान हुआ है।
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कोट्स
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद सभी बसों को रूट पर भेजने का प्रयास रहा, इसके बावजूद सुबह 3 बसों को रूट पर निकाला गया, लेकिन कर्मचारियों के काम पर न जाने से यह बसें वापस डिपो में आ गईं, हालांकि संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बसों को डिपो में वापस न आने दिया जाए, बल्कि उन्हें रूट पर भेजा जाए। दो दिन के चक्का जाम से विभाग को अंबाला डिपो से हुए नुकसान का अभी आकलन नहीं किया गया है।
-गगनदीप, जीएम रोडवेज, अंबाला।
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