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सरकार की एमपीडब्ल्यू योजना पर शुरू हुआ विवाद

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अमर उजाला ब्यूरो
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बराड़ा। सरकार की एमपीडब्ल्यू योजना पर विवाद शुरू हो गया। अध्यापक संघ ने जहां इसे शिक्षा विभाग का निजीकरण करार दिया है, वहीं इस पर सवाल भी उठाये हैं। साथ ही इसे पर्देे के पीछे से भर्ती करने का मामला बताया है।
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सरकार ने शिक्षा विभाग में एमपीडब्ल्यू (मल्टी परपज वर्कर) की तैनाती शुरू की है। इसके तहत स्कूलों में यह वर्कर अपनी ड्यूटी ज्वाइन भी कर रहे हैं। इसी पर हरियाणा अनुसूचित राजकीय जाति अध्यापक संघ ने एतराज जताया है। संघ के प्रधान बलविंदर सिंह, महासचिव मोहन लाल परोचा ने कहा कि पर्दे के पीछे से आउटसोर्सिंग भर्ती है, जिसमें आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है और न ही सरकार ने इसके लिए कोई विज्ञापन निकाला है। इन भर्तियों में आरक्षण का प्रावधान न करके सरकार अनुसूचित जाति के लोगों के साथ भेदभाव व उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ करके आरक्षण को समाप्त करना चाहती है जो कि संगठन कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। जिला महासचिव मोहन परोचा का कहना है कि यदि सरकार को भर्ती करनी ही थी तो यह भर्ती सरकारी एजेंसी द्वारा करवाई जानी चाहिए थी, जिससे अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग पूर्व सैनिक विकलांगों विधवाओं अन्य श्रेणियों को भी लाभ मिलता। इस भर्ती द्वारा विभाग को निजीकरण की तरफ धकेलने की साजिश रची जा रही है।
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